
MADHUBANI:- फर्जी महंत ने बेच दी सरकारी जमीन, जांच में कोताही के खिलाफ भाकपा माले का 3 अगस्त को धरना-प्रदर्शन का ऐलान
मधुबनी-24 जुलाई। रहिका अंचल के भौआड़ा गंगासागर मौजा के तहत भू-हदबंदी कानून के जरिए एक महंत से सरकार द्वारा अर्जित 15 एकड़ 85.5 डिसमल जमीन की अवैध रुप से खरीद-बिक्री की जांच कार्य में विलंब को लेकर भाकपा माले द्वारा 3 अगस्त को समाहरणालय के समक्ष धरना-प्रदर्शन किया जाएगा।
इसकी जानकारी देते हुए भाकपा माले के जिला सचिव ध्रुव नारायण कर्ण ने बताया कि महंत से सरकार द्वारा अर्जित 15 एकड़ 85.5 डिसमल जमीन में से जनवरी 1990 में सरकार ने 24 महादलितों के बीच 11 एकड़ 99 डिसमल जमीन का पर्चा वितरित किया गया। इसके खिलाफ भू-स्वामी महंत व कुछ अन्य लोगों के आवेदन पर तत्कालीन जिलाधिकारी ने भू-हदबंदी की धारा 45 (बी) के तहत पर्चाधारियों के दखल कब्जा पर रोक लगा दिया गया। वर्ष 2016 से कथित भूस्वामी महंत, भू-माफिया और प्रशासनिक सांठ-गांठ से भू-हदबंदी व पर्चावाली जमीन की अवैध ढंग से बिक्री किया जाता रहा। उन्होंने बताया कि श्रीराम जानकी मंदिर भौआड़ा गंगासागर मठ, बिहार धार्मिक न्यास पर्षद, पटना से पंजीकृत है। धार्मिक न्यास पर्षद के अधीन मठ, मंदिर के महंत को न्यास पर्षद से मान्यता मिलने पर ही वैध माना जाता है। साल 2016 को तत्कालीन जिलाधिकारी ने नियम के विपरित भू-धारी महंत के रूप में एक व्यक्ति को प्रतिस्थापित कर दिया गया।
तत्कालीन जिलाधिकारी ने कथित भू-धारी महंथ को नियम के विरूद्ध खेसरा 1047 में 2 एकड़ 96 डिसमल जमीन बिक्री का आदेश भी दे दिया गया। जबकि बिहार भूमि सुधार (अधिकतम सीमा निर्धारण तथा अधिशेष भूमि अर्जन) (संशोधन) विधेयक 2016 पास होने के बाद दिनांक 19 अगस्त 2016 को ही बिहार गजट असाधारण अंक बिहार सरकार द्वारा प्रकाशित किया गया था।उन्होंने बताया कि भू-हदबंदी के मामले में धारा 45 (बी) को निरसित करते हुए धारा 45 (घ) के तहत जिलाधिकारी के न्यायालय एवं अन्य न्यायालयों में लंबित वाद को समाप्त कर दिया गया। इस तरह लंबित वाद वाली भूमि भू-हदबदी के तहत सरकारी हो गई। इस नियम को धत्ता बताते हुए तत्कालीन जिलाधिकारी द्वारा 14 फरवरी 2017 को नियम के विरुद्ध जमीन बिक्री का आदेश दिया गया। उन्होंने बताया कि 21 मार्च 2017 को राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग के तत्कालीन प्रधान सचिव ने जिलाधिकारी व आयुक्त को पत्र देकर धारा 45 (बी) के तहत प्रारंभ किए गए गये सभी लंबित बादों को समाप्त कर अधिशेष घोषित जमीन का पूर्व में वितरित पर्चा की मान्यता प्रदान करते हुए पर्चाधारियों को जमीन का दखल दिलाने का निर्देश दिया गया। इसके बाद भी सरकारी आदेश की अवहेलना करते हुए अवैध भूधारी महंत ने भू-माफिया एवं प्रशासन के सांठ-गांठ से उक्त जमीन कि बिक्री किया जाता रहा है। अवैध महंत द्वारा भू-हदबंदी की तीन एकड़ जीमन शहर के एक दर्जन से अधिक लोगों को रजिस्टर्ड केवाला कर दिया गया। इस मामले में जिला प्रशासन में लगातार आवेदन देने के बाद भी कोई कार्रवाई नहीं किया गया।
मई 2022 में तत्कालीन जिलाधिकारी के आदेश पर रहिका अंचल अधिकारी ने अंचल अमीन से भूहदबंदी की जमीन की मापी कराई गई। लेकिन अब तक कोई कार्रवाई नहीं की गई।



