
नीट-यूजी विवाद पर नवीन पटनायक ने फिर मांगा धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा, ओडिशा में आंदोलन तेज करने का ऐलान
भुवनेश्वर, 22 जुलाई। बीजू जनता दल (बीजेडी) के अध्यक्ष एवं ओडिशा विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष नवीन पटनायक ने बुधवार को नीट-यूजी परीक्षा से जुड़े विवाद को लेकर केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान से इस्तीफे की मांग दोहराई। साथ ही उन्होंने घोषणा की कि बीजेडी कथित परीक्षा अनियमितताओं के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे छात्रों के समर्थन में पूरे ओडिशा में अपना आंदोलन और तेज करेगी।
नई दिल्ली से भुवनेश्वर लौटने के बाद बीजू पटनायक अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर पत्रकारों से बातचीत करते हुए पटनायक ने कहा कि परीक्षा विवाद ने पूरे देश को झकझोर दिया है और इस मामले में जवाबदेही तय की जानी चाहिए।
उन्होंने कहा, “देशभर में युवा छात्रों और विश्वविद्यालय परीक्षाओं से जुड़े घटनाक्रम को लेकर आंदोलन चल रहा है, जिसने पूरे देश को स्तब्ध कर दिया है। बीजेडी भी ओडिशा में इस मुद्दे पर आंदोलन करेगी।”
धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग दोहराते हुए नवीन पटनायक ने दावा किया कि देशभर में लोग केंद्रीय शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं और विदेशों में भारतीय दूतावासों के बाहर भी विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं।
उन्होंने कहा, “देशभर में लोग उनके इस्तीफे की मांग कर रहे हैं। भारत ही नहीं, विदेशों में भारतीय दूतावासों के बाहर भी प्रदर्शन हो रहे हैं। विश्वविद्यालय परीक्षाओं को लेकर जो कुछ हुआ है, उसके बाद मेरा मानना है कि उन्हें इस्तीफा दे देना चाहिए।”
नवीन पटनायक ने प्रदर्शनकारियों के खिलाफ पुलिस कार्रवाई की भी आलोचना की। उन्होंने आरोप लगाया कि छात्रों और विपक्षी नेताओं के साथ अनावश्यक बल प्रयोग किया गया।
उन्होंने कहा, “युवा छात्रों के खिलाफ हुई अनावश्यक पुलिस कार्रवाई से हर कोई स्तब्ध है। कल हमने संसद में नेता प्रतिपक्ष और कई वरिष्ठ नेताओं के साथ भी पुलिस का कठोर व्यवहार देखा। यह बेहद चिंताजनक है।”
पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि बीजेडी इस मुद्दे को ओडिशा में लगातार उठाती रहेगी और परीक्षा विवाद के खिलाफ आंदोलन कर रहे छात्रों के साथ खड़ी रहेगी।
उल्लेखनीय है कि नीट-यूजी परीक्षा विवाद को लेकर देश के विभिन्न हिस्सों में विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं। विपक्षी दल केंद्र सरकार पर प्रतियोगी परीक्षाओं की पारदर्शिता और विश्वसनीयता बनाए रखने में विफल रहने का आरोप लगाते हुए केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय से जवाबदेही तय करने की मांग कर रहे हैं।



