
मधुबनी- 06 जून। विश्व हरित छत दिवस पर मानव समृद्धि संस्थान के तत्वावधान में शहर के विनोदानंद झा कॉलोनी स्थित सब्जियों के पौधे लगाए गए। वहीं, पूर्व से लगाए गए सब्जियों के पौधो की देखभाल की जानकारी दी गई। पौधारोपण करते हुए संस्थान के संस्थापक सह महासचिव महेश चंद्र झा के कहा कि विश्व छत खेती दिवस का उद्देश्य छतों पर बागवानी और खेती को बढ़ावा देने के साथ-साथ जलवायु परिवर्तन से निपटने में हरित छतों और शहरी खेती के महत्व के बारे में जागरूकता फैलाना है।
शहरी क्षेत्रों में छत पर बागवानी करने के कई महत्वपूर्ण पर्यावरण और स्वास्थ्य लाभ हैं। छत का हरा आवरण गर्मियों में घर को ठंडा रखता है। धूप के प्रभाव को कम करता है। बिना रसायनों के अपने घर की छत पर जैविक तरीके से टमाटर, हरी मिर्च, धनिया जैसी सब्जियां उगा सकते हैं। मिट्टी और पौधे छतों पर गिरने वाले अतिरिक्त बारिश के पानी को सोखते हैं। पौधों और हरियाली के बीच समयबिताना मानसिक तनाव को कम करने में मददगार होता है। उन्होंने कहा कि शहर में जगह की कमी के चलते लोग बागवानी से वंचित रह जाते है। लेकिन घरों की छत पर बागवानी कर हरियाली के साथ फल-फूल और सब्जियां उगाई जा सकती है। उन्होंने कहा कि एक पौधे को लगाने में कई वर्ष गुजर जाते है। लेकिन काटने में वक्त नहीं लगता है। पेड़ों से कई यादें जुड़ी रहती है। पेड़-पौधे लगाने का काफी शौक है। छत पर खाली जगहों पर गमलों में पौधे लगाना चाहिए।
अपने छत को पौधों के खेत में बदलना चाहिए। छत पर आम, लीची, आंवला, डैगन फ्रुट जैसे कई फल के पेड़ लगा सकते है। लत्तीदार सब्जियां, टमाटर, मिर्च, धनिया, पुदीना व नींबू आसानी से उपजाई जा सकती है। रोजाना सुबह कुछ समय अपने पौधों को देते है। इन पौधों की वजह से घर में भी रोजाना ताजी सब्जियां मिल जाती है। एक पेड़ को लगाने में कई वर्षों की मेहनत लगती है। जिसके बाद पेड़ फल देने के लिए तैयार होते है। ऐसे में उन्हें कुछ मिनटों में काट देना बेहद ही दुखद है। एक पेड़ से कई प्रकार के फायदे होते है। यह फल, छांव के साथ ऑक्सीजन भी देते है।



