
JCB से गड्ढों की खोदाई में नियमों का पालन नहीं, मिट्टी खोदने के लिए लेना होता परमिट
मधुबनी- 03 जून। मधुबनी जिले में जेसीबी द्वारा खोदे गये गड्ढे बच्चों के लिए काल बन रहे हैं। डूबने वाले बच्चे ज्यादातर गरीब और सामाजिक रूप से पिछड़े होते हैं। पतौना थाना क्षेत्र के केरवार मेंजेसीबी से खुदे गए गढ़े डूबने से तीन लड़की समेत 5 बच्चों की दर्दनाक मौत हो गई है। प्रशांत कुमार (12) पिता दिनेश पड़ित, रिंकू कुमारी (10) पिता दिनेश पड़ित, अभिषेक कुमार (14) पिता छोटे पड़ित, शिवानी कुमारी (12) पिता ललित पड़ित स्नेहा कुमारी (9) पिता चुन्नू पड़ित सभी पतौना थाना क्षेत्र के केरवार निवासी है।
बतादें कि पिछले माह जिले के रहिका प्रखंड के मलंगिया गांव में जेसीबी द्वारा खोदकर खुले छोड़ दिए गड्ढे दो मासूम बच्चों की जान ले ली थी। प्रतिवर्ष जिले के विभिन्न हिस्सों में जेसीबी द्वारा खोदकर खुले छोड़ दिए गए गड्ढों ने बच्चों को निगल रहा है। नियमों के खिलाफ जेसीबी से जहां-तहां खुदाई करके छोड़ देने को लेकर न तो आपदा विभाग सजग है ना ही खनन विभाग को कोई मतलब है। पिछले दो साल-तीन साल में बिस्फी के बलहा में 1, दक्षिण भरनटोल में 2 और हीरो पट्टी में 3 बच्चों की मौत हुई है। पंडौल के सलेमपुर में करीब 2 महीना पहले 3 बच्चों की मौत जेसीबी के खोदे गड्डे में डूबने से हो चुकी है। लदनियां में जेसीबी के खोदे गड्ढे में डूबने से दो बच्चों की मौत हो गई।
इसी तरह झंझारपुर के पूरब कोठिया में एक ईंट उद्योग के कैपस में खोदे गए गड्ढे में डूबने से 2 बच्चों की मौत हो गई थी। इससे पूर्व बिस्फी, नूरचक, कोरियानी, सिमरी सहित अन्य गांवों में दर्जन भर से अधिक बच्चे जेसीबी से खोदे गए गड्ढों में डूबकर काल के गाल में समा गए। इन घटनाओं के बाद भी प्रशासन ध्यान इस ओर नहीं पहुंच रहा है। ऐसे मामलों में प्राथिमकी दर्ज नहीं होती है। नियमों के मुताबिक, ईंट भट्ठों को मिट्टी खोदने के लिए परमिट लेना होता है। खनन पदाधिकारी इसकी जांच करते हैं। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से एनओसी लेना होता है। रॉयलटी शुल्क जमा करना होता है। इसके बाद भट्ठा मालिकों को बताई गई जमीन में ही खनन करने की अनुमति होती है।
परमिट लेने के अलावा जमीन खोदने के भी कुछ नियम है। नियमों के मुताबिक, डेढ़ मीटर से ज्यादा गहराई तक किसी भी हालत में नहीं खुदाई की जा सकती है। इसके अलावा जुलाई से सितंबर माह की बीच बारिश के मौसम में खुदाई नहीं करनी है।निजी जमीनों से मिट्टी निकालने के लिए भी खनन विभाग में आवेदन देकर अनुमति लेनी होती है।अनुमति मिलने के बाद नियमों के मुताबिक, केवल डेढ़ मीटर से ज्यादा गहराई नहीं की जा सकती है। व्यवसायिक इस्तेमाल के लिये मिट्टी की खुदाई करने के लिए विभाग से मंजूरी लेने का प्रावधान है। इसके लिए जिला डिस्ट्रिक्ट मिनरल फंड में शुल्क जमा करना होता है। निजी जमीन पर खुदाई के लिए खनन प्लान देना होता है। खुदाई के बाद गड्ढे को सुरक्षा घेरे से घेरना होता है। इस तरह के किसी नियम का पालन नहीं किया जा रहा है।



