
अक्षय तृतीया 19 को मनाई जाएगी, इसी दिन हुआ था त्रेतायुग का प्रारंभ: ऋषिनाथ झा
मधुबनी- 13 अप्रैल। अक्षय तृतीया का अर्थ कभी क्षय ना होने वाला होता होता है। इस साल 19 अप्रैल को अक्षय तृतीया मनाई जाएगी। अक्षय तृतीया के धार्मिक महत्व की जानकारी देते हुए पं. ऋषिनाथ झा ने बताया कि इस दिन त्रेतायुग के प्रारंभ, भगवान परशुराम के जन्मोत्सव और मां अन्नपूर्णा जयंती के रूप में मनाई जाती है।मान्यता है कि भगवान विष्णु के छठे अवतार परशुराम जी का जन्म इसी दिन हुआ था। सतयुग का प्रारंभ इसी पावन तिथि से माना जाता है। पवित्र गंगा नदी का धरती पर अवतरण भी अक्षय तृतीया के दिन ही माना जाता है। इस दिन वेद व्यास ने भगवान गणेश के साथ मिलकर महाभारत लिखना शुरू किया था।
माता अन्नपूर्णा का जन्म दिवस होने से इस दिन अन्न दान का विशेष महत्व है। इस दिन भगवान विष्णु, माता लक्ष्मी और कुबेर देव की पूजा से सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है। भगवान कृष्ण ने इसी दिन सुदामा को निर्धनता से मुक्ति दिलाई थी। इस दिन शुभ कार्य, दान, पूजा का पुण्य कभी खत्म नहीं होता है। वह कई गुना बढ़कर वापस मिलता है। इस दिन सोना, चांदी और नई वस्तु खरीदना शुभ माना जाता है। यह समृद्धि का प्रतीक है। पवित्र नदियों में स्नान, दान कल्याणकारी होता है।



