बिहार

जातीय जनगणना को लेकर सुप्रीम कोर्ट में पीआईएल दाखिल, CM नीतीश ने कहा- इसका कोई मतलब नही, जो काम केन्द्र को करना चाहिए, वह काम हम कर रहे हैं, गणना से हर परिवार की आर्थिक स्थिति का पता चलेगा

मधुबनी- 11 जनवरी। समाधान यात्रा के तहत मुख्यमंत्री नीतीश कुमार बुधवार को मधुबनी पहुंचे। जहां सीएम ने कई कार्यक्रम में शामिल हुए और अधिकारियों के साथ बैठक भी किया। बैठक के बाद पत्रकारों से भी बातचीत किया। इस दौरान सीएम ने जातीय जनगणना को लेकर सुप्रीम कोर्ट में पी०आई०एल० दाखिल होने के सवाल पर मुख्यमंत्री ने कहा कि पी०आई०एल० कोई दाखिल करे, इसका कोई मतलब नहीं है। केंद्र के स्तर पर भी वर्ष 2011 के बाद जाति आधारित जनगणना हुआ, लेकिन वो ठीक नहीं हुआ। हम तो चाहते थे कि पूरे देश में जाति आधारित जनगणना हो, लेकिन केंद्र इसके लिए तैयार नहीं हुआ और कहा कि राज्य को अपना करना है, तो करें। हमलोग जनगणना नहीं गणना कर रहे हैं, जाति आधारित जनगणना करने का अधिकार तो केंद्र के पास ही है। जाति आधारित गणना से सबकी आर्थिक स्थिति का भी पता चलेगा। हर चीज की जानकारी ले रहे हैं, सर्वे करवा रहे हैं। इससे यह भी पता चलेगा कि बाहर में कितने लोग रह रहे हैं, काम क्या कर रहे हैं। कोरोना के दौरान 20 से 25 लाख लोग यहाँ आये। अब ये बात समझ के परे है कि कोई पी०आई०एल० दाखिल कर रहा है। यह काम सबके हित में है। लोगों की गिनती के साथ ही हर परिवार की आर्थिक स्थिति का भी पता लगाया जा रहा है, चाहे वे कोई भी जाति के हों या फिर किसी भी धर्म के हों। सब के परिवार की आर्थिक स्थिति का हमलोग पता लगवा रहे हैं। केंद्र के स्तर पर ये काम पहले भी हुआ है लेकिन वो ठीक से नहीं करवा पाए, केंद्र यह काम पूरे देश में करवा चुका है। अलग-अलग राज्यों में कुछ हद तक इसे करवाया गया है। लेकिन हमलोग बहुत ही बढ़िया ढंग से यह काम करवा रहे हैं। यहां पर केवल लोगों की गिनती नहीं होगी, बल्कि उनकी आर्थिक स्थिति का भी पता लगाया जाएगा।

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