
नई दिल्ली- 21 नवंबर। सुप्रीम कोर्ट ने सरकारी अस्पतालों में बिना जरूरी योग्यता के फार्मासिस्टों के काम करने पर बिहार सरकार को फटकार लगाई है। जस्टिस एमआर शाह की अध्यक्षता वाली बेंच ने कहा कि दवा वितरण का काम अप्रशिक्षित कर्मियों को देना खतरनाक है।
कोर्ट ने बिहार सरकार को यह सुनिश्चित करने का निर्देश दिया कि पूरे राज्य में एक भी अस्पताल रजिस्टर्ड फार्मासिस्टों की मदद के बिना किसी भी दवा का वितरण नहीं करे। कोर्ट ने कहा कि अगर कोई अप्रशिक्षित व्यक्ति गलत दवा या दवा की गलत खुराक देता है और इसका परिणाम कुछ गंभीर होता है तो इसका जिम्मेदार कौन होगा। कोर्ट ने कहा कि हम बिहार सरकार को अपने नागरिकों के जीवन के साथ खिलवाड़ करने की अनुमति नहीं दे सकते।
सुनवाई के दौरान बिहार सरकार की ओर से पेश वकील ने कहा कि राज्य सरकार दोषी कर्मचारियों के खिलाफ मिली शिकायतों के आधार पर कार्रवाई करेगा। इस दलील को सुप्रीम कोर्ट ने खारिज करते हुए कहा कि जहां गरीबी और शिक्षा की कमी है, आप शिकायत दर्ज होने तक इंतजार नहीं कर सकते, वह भी बिहार जैसे राज्य में। आप इस मामले की गंभीरता को नहीं समझते। यह सिर्फ एक मामला नहीं है। सवाल फर्जी फार्मासिस्ट का भी है और फर्जी डॉक्टर का भी।
कोर्ट ने बिहार सरकार के वकील से कहा कि प्रदेश में आपको फर्जी डॉक्टर और फर्जी कंपाउंडर की भरमार मिल जाएगी। गरीब और अनपढ़ लोगों को उनके पास जाना पड़ता है। बिहार के अस्पतालों की हालत सबसे खराब है और आप कह रहे हैं कि आप शिकायत दर्ज होने तक इंतजार करेंगे। तब राज्य सरकार ने कहा कि इस मामले में बिहार राज्य फार्मेसी परिषद निष्क्रिय है।
याचिका मुकेश कुमार ने दायर की है। याचिका में कहा गया है कि बिहार में फार्मेसी प्रैक्टिस रुल्स को अभी तक लागू नहीं किए गए हैं। ये रुल्स रजिस्टर्ड फार्मासिस्टों में नैतिक मानकों को सुनिश्चित करने के लिए बनाए गए हैं। इसका खामियाजा आम जनता को भुगतान पड़ रहा है।



