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हिमाचल विस चुनाव: भाजपा के टिकट वितरण में वंशवाद और संगठन का बोलबाला

शिमला- 24 अक्टूबर। हिमाचल प्रदेश की सत्ता पर दोबारा काबिज होने के लिए भाजपा नेतृत्व नई रणनीति के साथ विधानसभा चुनाव में उतरा है। मिशन रिपीट को साधने के लिए भाजपा ने कई नेताओं के परिजनों को उम्मीदवार बनाया है। इसके अलावा संगठन में अहम ओहदे संभाल रहे और सरकार में निगम-बोर्डों के अध्यक्ष-उपाध्यक्ष रहे उम्मीदवारों की भी भरमार है।

टिकट वितरण में भाजपा के आम कार्यकर्ता को ज्यादा तरजीह नहीं मिली है।

भाजपा हाईकमान ने एक मंत्री और 10 मौजूदा विधायकों की टिकटें काट कर सत्ता विरोधी लहर को कम करने की कोशिश की है। चुनावी रण में 19 नए चेहरे उतारे गए हैं। संगठन के आठ नेताओं और बोर्डों-निगमों के अध्यक्षों-उपाध्यक्षों से पांच उम्मीदवार बनाए गए हैं। सात टिकट नेताओं के परिजनों को मिले हैं।

भाजपा का राष्ट्रीय नेतृत्व भले ही एक पद-एक सिद्धांत का दावा करता है और इसी कारण केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष का पद छोड़ना पड़ा था। लेकिन सूबे में भाजपा ने संगठन व बोर्डों-निगमों में काबिज नेताओं को उम्मीदवार बनाने के लिए कई सिटिंग विधायकों और पूर्व प्रत्याशियों के टिकट काटने में कोई गुरेज नहीं किया है। यही वजह है कि भाजपा को कई सीटों पर बगावत का सामना करना पड़ रहा है।

भाजपा के सभी 68 उम्मीदवारों पर नजर डालें तो पार्टी ने 32 मौजूदा विधायकों को टिकट देने के साथ-साथ उन प्रमुख नेताओं के परिजनों को टिकट देने का ध्यान रखा है जिनके टिकट काटे गए हैं। भाजपा ने संगठन और बोर्डों निगमों के ओहदेदारों में लगभग डेढ़ दर्ज़न नेताओं को टिकट थमाए हैं।

संगठन के तमाम नेताओं को तवज्जो

प्रदेश भाजपा के तीनों महामंत्रियों त्रिलोक जमवाल, त्रिलोक कपूर और मौजूदा विधायक राकेश जमवाल को क्रमशः बिलासपुर, पालमपुर और सुंदरनगर से उतारा गया है। इसी तरह प्रदेश भाजपा के कोषाध्यक्ष संजय सूद शिमला शहरी से, मुख्य प्रवक्ता रणधीर शर्मा श्री नैना देवी जी से, महासू भाजपा अध्यक्ष अजय श्याम ठियोग से, संगठनात्मक जिला सुंदरनगर के अध्यक्ष दिलीप ठाकुर सरकाघाट से, शिमला जिला भाजपा अध्यक्ष रवि मेहता शिमला ग्रामीण, प्रवक्ता प्रो. रामकुमार को हरोली और सह-मीडिया प्रमुख रजत ठाकुर को धर्मपुर से टिकट मिला है।

बोर्डों-निगमों के इन ओहदेदारों को मिला टिकट

बोर्डों-निगमों के जिन ओहदेदारों को टिकट मिला है, उनमें हिमकोफेड के अध्यक्ष कौल नेगी को रामपुर से, राष्ट्रीय बचत राज्य सलाहकार बोर्ड हिमाचल के उपाध्यक्ष संजय गुलेरिया को ज्वाली से, राज्य आपदा प्रबंधन प्रकोष्ठ के उपाध्यक्ष रणधीर शर्मा, राज्य वितायोग के अध्यक्ष सतपाल सिंह सत्ती, कैलाश फेडरेशन के अध्यक्ष रवि मेहता, ग्रामीण विकास बैंक की अध्यक्ष शशि बाला को रोहड़ू से, वन विकास निगम के उपाध्यक्ष सूरत नेगी को किन्नौर से, खाद्य आपूर्ति निगम के उपाध्यक्ष बलदेव तोमर को शिलाई से और एचआरटीसी के उपाध्यक्ष विजय अग्निहोत्री को नादौन से टिकट मिला है।

टिकट आवंटन में रही परिवारवाद की छाप

टिकट आवंटन में परिवारवाद की छाप से भाजपा बाहर नहीं निकल पाई है।

हमीरपुर जिला के बड़सर से पूर्व विधायक बलदेव शर्मा की जगह उनकी पत्नी माया शर्मा को टिकट दिया है।

इसी तरह मंडी जिले की धर्मपुर सीट पर जयराम सरकार में मंत्री रहे महेंद्र सिंह की जगह इस बार उनके बेटे रजत ठाकुर को टिकट थमा दी गई। शिमला जिले की जुब्बल कोटखाई सीट से स्वर्गीय नरेंद्र बरागटा के बेटे चेतन बरागटा को पार्टी ने टिकट दिया है।

मंडी सदर सीट से भाजपा का टिकट पाने वाले अनिल शर्मा पूर्व केंद्रीय मंत्री स्वर्गीय सुखराम के बेटे हैं।

कुल्लू जिले की मनाली सीट से गोविंद ठाकुर और हमीरपुर जिले की भोरंज सीट से भाजपा उम्मीदवार बनाए गए अनिल धीमान भी परिवारवाद की श्रेणी में आते हैं। चंबा सदर सीट से मौजूदा विधायक पवन नय्यर की पत्नी नीलम नय्यर को उम्मीदवार बनाया गया।

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