
बिहार में अब बच्चों को खाना परोसने से पहले शिक्षक खुद चखेंगे भोजन, गुणवत्ता का देना होगा प्रमाण-पत्र
पटना- 06 नवंबर। बिहार के सरकारी और सरकारी सहायता प्राप्त विद्यालयों में मध्याह्न भोजन (पीएम पोषण योजना) की गुणवत्ता को लेकर शिक्षा विभाग ने बड़ा निर्देश जारी किया है। अब बच्चों को भोजन परोसने से पहले प्रधानाध्यापक या उनके द्वारा नामित शिक्षक को स्वयं भोजन ग्रहण कर उसकी गुणवत्ता जांचनी होगी और प्रमाण-पत्र देना होगा।
मध्याह्न भोजन योजना निदेशालय, शिक्षा विभाग, बिहार सरकार के निदेशक विनायक मिश्र ने सभी जिला शिक्षा पदाधिकारियों को इस संबंध में पत्र जारी किया है।जारी इस पत्र में कहा गया है कि ऐसी सूचना प्राप्त हो रही है कि केंद्रीकृत रसोईघर, विद्यालय शिक्षा समिति द्वारा सरकारी विद्यालयों में निम्न मानक का खाना बच्चों को खिलाया जा रहा है।
प्रत्येक विद्यालय में प्रधानाध्यापक, प्रभारी प्रधानाध्यापक, प्रधान शिक्षक, प्रभारी प्रधान शिक्षक या उनकी अनुपस्थिति में उनके द्वारा नामित शिक्षक प्रत्येक दिन बच्चों को भोजन परोसने के पूर्व भोजन ग्रहण करेंगे। भोजन की गुणवत्ता से संबंधित प्रमाण-पत्र अंकित करेंगे। प्रमाण-पत्र को विद्यालय अभिलेख में सुरक्षित संधारित किया जाएगा।
प्रमाण-पत्र का प्रारूप “मेरे द्वारा भोजन ग्रहण किया गया एवं भोजन की गुणवत्ता अच्छी है। मैं प्रमाणित करता हूँ कि भोजन बच्चों के खाने योग्य है।”
सभी जिला कार्यक्रम पदाधिकारी, मध्याह्न भोजन योजना को इस निर्देश का दृढ़ता से पालन कराने का निर्देश दिया गया है। इसकी प्रतिलिपि अपर मुख्य सचिव, शिक्षा विभाग के प्रधान आप्त सचिव को भी सूचनार्थ भेजी गई है।



