बिहार

MADHUBANI: ‘कथा 89 की’ खेसरा 89 मामले में 47 भू-स्वामी बना बलि का बकरा, बच निकले राजस्व कर्मी, आरओ और सीओ

मधुबनी – 05 जुलाई। नगर थाना में 3 जुलाई को दर्ज प्राथमिकी सं. 337/2026 को लेकर 4 जुलाई सुबह से देर रात तक सोशल मीडिया और 5 जुलाई को प्रिंट मीडिया में प्रमुखता से चर्चा का विषय बना रहा। इस मसले पर आम से लेकर खास लोगों की नजर बनी रही। अधिकांश लोगों ने प्राथमिकी के लिए रहिका अंचल अधिकारी की सराहना की गई।वहीं, भू-स्वामियों में बेचैनी देखी गई। इस मामले अब पुलिस और न्यायालय की प्रकिया के लिए इंतजार करना होगा। बहरहाल, साल 1901 की खतियान में दर्ज खेसरा 89 गैरमजरुआ ‘खास’ पर गौर करना लाजिमी होगा।

खेसरा 89 को लेकर लड़ी गई लंबी कानूनी लड़ाई

बता दें कि मधुबनी शहर का 40 प्रतिशत से अधिक घर, दुकान, मकान, प्रतिष्ठान गैरमजरुआ खास खेखरा पर खड़ी है। अब तक की पड़ताल के अनुसार खेसरा 89 को लेकर लंबी कानूनी लडाई लड़ने की बात सामने आई है। सीएस खतियान (कैडस्ट्रल सर्वे) के अनुसार खेसरा 89 गैरमजरुआ खास पोखर है। वर्तमान में उक्त भूमि का स्वरूप परती बताया गया है। इस जमीन की जमाबंदी जमीन विक्रेता के नाम से चलती है। यह जमीन गैरमजरुआ आम, भूदान, भूहदबंदी और केसरे हिंद से मुक्त बताया गया है।

89 की जमीन पूर्व जमीनदार से लक्ष्मण सहनी को बंदोबस्त से प्राप्त

जानकारी के मुताबिक यह जमीन पूर्व विक्रेता लक्ष्मण सहनी को पूर्व जमीनदार द्वारा बंदोबस्त से प्राप्त है। जिसे डीसीएलआर सदर मधुबनी के वाद सं. 3/78-79 में भूमि को सरकारी घोषित करते हुए अपना कब्जा किया। इस वाद सं. 3/78-79 में के विरुद्ध लक्ष्मण सहनी वगैरह द्वारा उच्च न्यायालय पटना में वाद सं. 4789/82 दायर किया गया। जिसमें उच्च न्यायालय न्यायालय द्वारा जमाबंदी पुनर्जीवित कर कब्जा वापस करने का आदेश पारित किया गया। जिससे लक्ष्मण सहनी वगैरह द्वारा जमीन बेचना प्रारंभ किया गया। लेकिन डीसीएलआर सदर द्वारा जमीन निबंधन पर रोक लगा दिया गया।

साल 1982 में निबंधन करने का दिया गया था आदेश

डीसीएलआर के निबंधन पर रोक के विरुद्ध लक्ष्मण सहनी वगैरह द्वारा उच्च न्यायालय में वाद सं. 4974/ 82 दायर किया। जिसमे न्यायालय द्वारा अवर निबंधन पहाधिकारी को निबंधन करने का आदेश दिया गया। डीसीएलआर सदर को 500 (पांच सौ रुपये) जुर्माना लगाया गया। इसके बाद जिलाधिकारी द्वारा विक्रेता के जमाबंदी को पहले निरस्त कर दिया गया। बाद में जिलाधिकारी द्वारा वाद सं. 77/93-94 में जमाबंदी को पूर्नजिवित करने का आदेश पारित किया गया। जिलाधिकारी द्वारा अपने पत्रांक 709 दिनांक 30-3-13 द्वारा एलपीए दायर करने हेतु राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग पटना से अनुमति मांग किया गया। जिलाधिकारी के पत्र के आलोक में राजस्व एवं भूमि सुधार ने अपने पत्रांक 6 दिनांक 17/1/2014 द्वारा सरकार के महा अधिवक्ता से राय लेकर भेजा गया। महा अधिवक्ता द्वारा अपने मंतव्य में जिक्र किया गया कि अब तक के सभी न्यायालय के समक्ष जितने भी तथ्य प्रस्तुत किया गया उसके अतिरिक्त कोई भी नया तथ्य हो तो आयुक्त दरभंगा के न्यायालय में अपील किया जा सकता है। सभी आदेश के अवलोकन से ज्ञात होता है कि सरकारी अधिवक्ता से विधि राय के पश्चात दाखिल खारिज की कार्रवाई की जा सकती है। इसके बाद भी खेसरा 89 के केवालदार का दाखिल खारिज रद्द कर दिया।

खेसरा 89 में दाखिल खारिज करने वाले कर्मचारी, आरओ, सीओ पर कार्रवाई नहीं

सवाल यह भी कि इसी खेसरा में कई केवालदार की दाखिल खारिज किस आधार पर की गई। आखिर दाखिल खारिज के लिए प्रस्ताव देने वाले राजस्व कर्मचारी, राजस्व पदाधिकारी और अंचल अधिकारी पर कानूनी कार्रवाई से क्पों नहीं किया गया। भूस्वामी को ही बलि का बकरा बनाया जाता है।

गैरमजरुआ खास जमीन का दाखिल खारिज नहीं होने से संकट में जिले के हजारों भू-स्वामी

बता दें कि पिछले कुछ सालों से सरकार द्वारा गैरमजरुआ खास की जमीन का दाखिल खारिज नहीं किया जाना जिले के हजारों भू-स्वामियों को संकट में डाल दिया है। सवाल यह है कि जब गैरमजरुआ खास जमीन का दाखिल खारिज नहीं हो सकता तो खास खेसरा वाली जमीन का निबंधन की छूट क्यो दी गई है।

केशरे हिंद जमीन पर आलीशान बिल्डिंग, बड़े-बड़े शोरूम, घर, दुकान, बैंकों की शाखा

बता दें कि थाना चौक से प्रधान डाकघर होकर रेलवे स्टेशन जाने वाली सड़क के दोनों ओर आलीशान बिल्डिंग, बड़े-बड़े शोरूम, घर, दुकान, बैंकों की शाखा वाली जमीन का खेसरा केशरे हिंद से संबंधित होने की बात बताई जाती रही है। जबकि केशरे हिंद से संबंधित खेसरा वाली जमीन की खरीद-बिक्री गंभीर मामलों में आता है।

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