
MADHUBANI शहर के सरकारी तालाबों को अतिक्रमण मुक्त का निर्देश, कार्रवाई का इंतजार: बिरेन्द्र कुमार निधि
मधुबनी- 21 अप्रैल। शहर के आरटीआई एवं सामाजिक कार्यकर्ता बिरेन्द्र कुमार निधि ने कहा कि नगर निगम क्षेत्र के 32 तालाबों को अतिक्रमण मुक्त कराने का निर्देश निश्चित रूप से सराहनीय है। निगम के इन तालाबों पर अतिक्रमण की समस्या पिछले कई सालों से बढ़ता ही चला गया। जबकि तालाबों से मत्स्य विभाग को सालाना बड़े पैमाने पर राजस्व की प्राप्ति होती है। लेकिन मत्स्य विभाग तालाबों के रखरखाव, उसे अतिक्रमण मुक्त कराने को लेकर उदासीन रहा है। मत्स्य विभाग तालाबों के रखरखाव, सौंदर्यीकरण पर राशि खर्च नहीं करती है, और ना ही इस दिशा में कोई ठोस कार्रवाई की जाती है। मत्स्य विभाग को सैरात सूची में शामिल अतिक्रमित तालाबों की जानकारी होने के बाद भी सालों से तालाबों को अतिक्रमण मुक्त कराने की ठोस कार्रवाई नहीं किया जाना मत्स्य विभाग की कार्यशैली को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि अब देखना है कि इस बार जिलाधिकारी के निर्देश पर निगम क्षेत्र 32 तालाबों को अतिक्रमण से मुक्त कराई जाती है या यह भी छलावा साबित होता है।
तालाबों को अतिक्रमण से मुक्त कराई जाती है तो निश्चित रूप से यह बड़ी बात होगी, अन्यथा इस बार भी मामला ढाक के तीन पात साबित होगा। उन्होंने एक मामला सिविल अपीलवाद 1132/2011, एसएलपी-सी संख्या-3109/2011, 2010 की विशेष अनुमति याचिका सिविल सीसी संख्या-19869 जगपाल सिंह बनाम पंजाब राज्य अन्य) का उल्लेख करते हुए कहा कि सुप्रीम कोर्ट का स्पष्ट निर्देश है कि तालाबों का अतिक्रमण नहीं किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि जिला प्रशासन का संरक्षण और सुरक्षा मिले तो नगर पालिका से नगर निगम बनने तक के बीच की अतिक्रमित भूमि संबंधी सूची जिला प्रशासन को उपलब्ध करा सकते हैं। नगर पालिका के तत्कालीन विशेष कार्यपालक पदाधिकारी वीर बहादुर सिंह के समय हाईकोर्ट पटना के आदेश के आलोक में राज्यभर में चलाए गए अतिक्रमण हटाओ अभियान के तहत नगर पालिका की चिन्हित अतिक्रमण भूमि की सूची उपलब्ध कराई जा सकती है।



