
जुड़शीतल बुधवार को, नहीं जलेगा घर का चूल्हा, होगी पूजा-अर्चना
मधुबनी- 14 अप्रैल। मिथिला की लोकपर्व जुड़शीतल पर्व बुधवार को मनाई जाएगी। जुड़शीतल पर्व की तैयारी पूरी कर ली गई है। सुबह में माता-पिता, बड़े-बुजुर्ग पूजा-अर्चना के बाद घर के सभी सदस्यों को सिर पर चुल्लू से पानी डाल ‘जुड़ायल रहु’ का आशीर्वाद देगें। ज्योतिषाचार्य पं. मोहित नारायण मिश्र ने बताया कि हरेक साल अप्रैल में होने वाले जुड़शीतल के दिन का चूल्हा नहीं जलता है। चूल्हे को विराम देकर वातावरण को गर्म होने से रोकने की कोशिश होती है। आज के दिन का भोजन एक दिन पूर्व रात्रि में तैयार कर लिया जाता है। भोजन में तरह-तरह के व्यंजनों के साथ चना बेसन और दही से तैयार कढ़ी जरुर होता है। जुडशीतल के दिन मधुबनी शहर के महाराजगंज के शीतला माता मंदिर में विशेष पूजा-अर्चना की जाती है।
उन्होंने बताया कि जुड़शीतल के दिन पितरों के लिए जल से भरे मिट्टी के पात्र लटकाए जाते हैं। छिद्र वाले मिट्टी के पात्र से समाधि पर जल का प्रवाह होता है। गर्मी के आगमन से वाष्पोत्सर्जन की दर बढ़ जाती है। जुडशीतल के दिन धुरखेल की परंपरा रही है। ग्रामीण क्षेत्रों में लोग नदी, तालाब, कुआं व अन्य जलस्रोतों के पास एकत्रित होकर एक-दूसरे पर जल के साथ ही तलहटी में जमे कीचड़ को फेंककर लोग धुरखेल का आनंद उठाएगे। इससे कुआं तालाब, मटका और पानी टंकी जैसे जलस्रोतों तक की सफाई होती है। पेड़-पौधों को पानी दिया जाता है।



