
BJP कार्यकर्ताओं ने सीएम पर उठाया सवाल, कहा- मुख्यमंत्री जी, संविधान का हवाला मत दीजिए आप प्रत्यक्ष निर्वाचित नहीं होते हैं
बेगूसराय- 15 मार्च। बिहार विधानसभा में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार द्वारा विधानसभा अध्यक्ष पर उंगली उठाने के बाद भाजपा कार्यकर्ता अध्यक्षीय आसन के सम्मान पर बड़ा सवाल उठा रहे हैं। तमाम सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर विधानसभा अध्यक्ष विजय कुमार सिन्हा के समर्थन में लगातार पोस्ट किए जा रहे हैं। फेसबुक पर ”आई सपोर्ट विजय कुमार सिन्हा” आईडी से लगातार पोस्ट कर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पर बड़े सवाल उठाए जा रहे हैं।
एक पोस्ट में कहा गया है कि मुख्यमंत्री जी, एक दारोगा को बचाने के लिये विधानसभा में आप अपना आपा खोकर विधानसभा अध्यक्ष पर ही चिल्ला चिल्ली शुरू कर दिए, हुजूर यह अशोभनीय था। समस्त भारत आपको अगला किसी संवैधानिक पद पर देख रहा है और आप एक दारोगा, डीएसपी को गोद में लिए घूम रहे हैं। जिस संविधान ने आपको तीसरे नंबर की पार्टी के विधानमंडल का नेता होने के बाद भी मुख्यमंत्री बनने का मौका दिया, वही संविधान लखीसराय के विधायक सह विधानसभा अध्यक्ष को भी कुछ शक्तियां दी है। बतौर गृहमंत्री आप सदन में किसी प्रश्न का जवाब नही देते हैं। बगल वाले कमरे में बैठ जाते हैं और वयोवृद्ध विजेंद्र बाबू को अपना जवाब बोलने के लिए लगा देते हैं। यह तो सन 1990 से लगातार प्रत्यक्ष रूप से निर्वाचित विजेंद्र बाबू जैसे वरिष्ठ राजनेता की भी तौहीनी है।
आप सदन में अपने कक्ष में मौजूद थे, तब आपको अपने विभाग का जवाब आपको खुद देना चाहिए था। आप तो खुद कई सालों से प्रत्यक्ष रूप से निर्वाचित नहीं हैं तो आपको क्या पता कि प्रत्यक्ष रूप से निर्वाचित विधायक-सांसद को अपने जनता के बीच कैसे-कैसे सवालों से गुजरना होता है और हां, संविधान का हवाला मत दीजिए। मासूम लोगों को फंसाया गया है, त्वरित कारवाई होनी चाहिए थी। विजय बाबू सिर्फ विधानसभा अध्यक्ष ही नहीं हैं, बल्कि एक विधायक भी हैं, उन्हें जनता के बीच भी जाना होता है। गृह मंत्रालय आपके पास है, किस इलाके में कौन सा दारोगा जायेगा, यह आपका विभाग निर्णय लेता है। इलाके में गुंडे मवाली ऑर्केस्ट्रा बुलवाए, नाच देखने की लालसा में मासूम लोग भी चले गए, आपका प्रशासन आयोजकों को छू भी नहीं पाया और मासूम दर्शकों को पकड़ लिया, केस कर दिया। अब वो लोग कहां जायेंगे? किस दरबार अपनी व्यथा कहेंगे? किस हाकिम के सामने अपनी कहानी सुनाएंगे? और पिछले एक महीने से एक विधायक सह विधानसभा अध्यक्ष असल गुनहगार ऑर्केस्ट्रा को बुलाने वालों पर कारवाई करने की मांग कर रहा और मासूम दर्शकों को रिहाई की उम्मीद कर रहा है तो क्या गुनाह कर रहा है?
आप पहले तेजस्वी पर अपना आपा खो बैठते हैं, फिर अब अपने विधानसभा अध्यक्ष पर। आप सदन में बहुमत के नेता हैं लेकिन सदन के सर्वेसर्वा नहीं, यह भी संविधान कहता है। दूसरे पोस्ट में कहा गया है कि नीतीश कुमार तमतमाये हुये हैं, विधानसभा अध्यक्ष साहब पर एकदम हाथ-पैर भांजे हुये हैं। कोई गरिमा है कि नहीं सदन की, या फिर यहां बीजेपी के अध्यक्ष साहब को टारगेट किया जा रहा है। जनहित में होने वाले कार्यवाही का संज्ञान देकर कोर्ट और वकालत को बीच में लाकर मुख्यमंत्री अपनी नाकामियों को छुपाना चाह रहे हैं। यह कतई शोभा नहीं देता कि विधानसभा अध्यक्ष की कुर्सी पर आसीन विजय कुमार सिन्हा को सदन की कार्यवाही के दौरान झुठलाने और बरगलाने की कोशिश की जाय। 17 साल से सरकार आपकी थी और विधानसभा अध्यक्ष भी आपका, इसीलिए उनकी हिम्मत नहीं हुई आपसे कुछ पूछने की। आज बिहार विधानसभा को बिहार एवं देश से एक-एक लोग देख रहा है और आपके मानसिकता को भी, ऐसा तो नहीं कि राष्ट्रपति पद से नाम हट जाने से तिलमिलाए हुए हैं।



