
षोडशोपचार पूजा से होती आध्यात्मिक उन्नति और ईष्ट देव की कृपा: आचार्य
मणुबनी- 16 मई। मधेपुरा के सिंघेश्वर स्थान मंदिर न्यास समिति के सदस्य अमरनाथ ठाकुर उर्फ लाल बाबा ने बाबा कपिलेश्वर नाथ का षोडशोपचार पूजा और रुद्राभिषेक अनुष्ठान किया। पूजा बाद कपिलेश्वर स्थान मंदिर न्यास समिति के कोषाध्यक्ष आचार्य संतोष झा, उपाध्यक्ष प्रभात रंजन, सचिव सुदर्शन कुमार ने अमरनाथ ठाकुर उर्फ लाल बाबा का मिथिला के पारंपरिक पाग, दोपटा से सम्मानित किया। आचार्य संतोष झा ने कहा कि ईश्वर को सोलह अलग-अलग तरीकों से भक्ति की जाने वाली पूजा षोडशोपचार पूजन पवित्र पूजा पद्धतियों में से एक है। जिससे साधक को मानसिक शांति, आध्यात्मिक उन्नति और ईष्ट देव की पूर्ण कृपा प्राप्त होती है।
षोडशोपचार पूजन के सोलह चरणों में देवताओं को पूजा स्थल पर आमंत्रित करना और उनका ध्यान करना। भगवान के बैठने के लिए आदरपूर्वक आसन प्रदान करना। भगवान के चरण धोने के लिए जल अर्पित करना। हाथों को शुद्ध करने या जल और पुष्प अर्पित करना। देवताओं को शुद्ध आचमनीय जल देना (मुंह धोने या पीने के लिए)। भगवान को जल, पंचामृत आदि से स्नान कराना।भगवान को स्वच्छ वस्त्र अर्पित करना। भगवान को जनेऊ धारण करवाना। प्रभु को चंदन, रोली का तिलक लगाना। सुगंधित फूल और माला अर्पित करना। धूप और अगरबत्ती जलाकर सुगंध फैलाना।दीपक जलाना। फल, मिठाई, सात्विक भोजन का भोग लगाना।मुख शुद्धि के लिए पान, सुपारी, लौंग और इलायची अर्पित करना।
भगवान की आरती करना। भगवान के चरणों में पुष्प अर्पित करना, साष्टांग प्रणाम करना और परिक्रमा करना। इन 16 चरणों के माध्यम से भक्त अपना तन, मन और वचन ईश्वर को पूर्ण रूप से समर्पित कर देता है। यह अहम् (अहंकार) को समाप्त करके मन को शुद्ध करता है। यह पूजा मनुष्य की पांचों ज्ञानेंद्रियों को पवित्र करती है। षोडशोपचार पूजा विधि मंदिरों में पुजारियों द्वारा या घरों में विशेष अवसरों पर की जाती है। इससे देवता बहुत शीघ्र प्रसन्न होकर भक्तों की मनोकामनाएं पूरी करते है।



