भारत

महिला जनप्रतिनिधि आम महिलाओं की अपेक्षाओं, आकांक्षाओं को संवेदनशीलता से समझती हैं: लोकसभा अध्यक्ष

नई दिल्ली-09 अगस्त। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने बुधवार को संसद भवन परिसर में संसदीय लोकतंत्र शोध और प्रशिक्षण संस्थान (प्राइड) द्वारा राज्य विधान मंडलों की महिला सदस्यों के लिए आयोजित प्रबोधन कार्यक्रम को संबोधित किया।

इस अवसर पर लोस अध्यक्ष बिरला ने कहा कि संसद भवन में 75 वर्ष पहले देश के संविधान का निर्माण हुआ, जो आज भी विश्व का सबसे प्रगतिशील संविधान माना जाता है। देश की लोकतांत्रिक यात्रा में संविधान ने निरंतर मार्गदर्शन किया है तथा देश की सामाजिक-आर्थिक प्रगति की बुनियाद रखी है। बिरला ने कहा कि संविधान जनता के अधिकारों और कर्तव्यों के साथ साथ राज्य के दायित्वों की बात करता है।

यह उल्लेख करते हुए कि लोकतंत्र भारत की संस्कृति और संस्कार का हिस्सा है, उन्होंने कहा कि प्राचीन काल से ही भारत की संस्कृति और सभ्यता का आधार महिलाओं का आदर और सम्मान रहा है। आजादी की लड़ाई, संविधान के निर्माण और देश के निर्माण में महिलाओं का योगदान पुरुषों से किसी भी प्रकार कम नहीं रहा है।

ओम बिरला ने बताया कि भारतीय महिलाएं सहभागिता के आधार पर तेजी से नेतृत्व की भूमिका में हैं और वे प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की राष्ट्र के समावेशी विकास की संकल्पना में बढ़-चढ़ कर अपना योगदान दे रही हैं।उन्होंने आशा व्यक्त करते हुए कहा कि प्रबोधन कार्यक्रम से सभी महिला जनप्रतिनिधियों को सभा के नियमों, परंपराओं और पद्धतियों की समुचित जानकारी मिलेगी, जिससे वे अपनी-अपनी सभाओं में लोक महत्व के मामलों को बेहतर तरीके से उठा सकें। बिरला ने कहा कि शासन प्रणाली के विभिन्न स्तरों पर मौजूद विधायी संस्थाएं देश के लोकतांत्रिक ढांचे का आधार हैं तथा संसद और राज्य विधान मंडल जनता के विभिन्न मतों का प्रतिनिधित्व करते हैं। बिरला ने चेताया कि विधायिका का प्रभावी कार्यकरण जनप्रतिनिधि के विधायी दायित्वों के कुशल निर्वहन पर निर्भर करता है।

लोकसभा अध्यक्ष ने सभी जनप्रतिनिधियों को सुझाव दिया कि सदस्यों का आचरण ऐसा होना चाहिए, जिससे विधायिका की गरिमा बढ़े। उन्होंने विचार व्यक्त किया कि लोकतांत्रिक शासन प्रणाली में राष्ट्रीय हित को ध्यान में रखते हुए सभा में विभिन्न राजनीतिक दलों को परस्पर सहयोग के साथ कार्य करना चाहिए, क्योंकि यही लोकतंत्र की मूल भावना है।

उन्होंने कहा कि महिला जनप्रतिनिधियों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है क्योंकि महिला जनप्रतिनिधि आम महिलाओं के कल्याण और उनकी अपेक्षाओं एवं आकांक्षाओं को संवेदनशीलता से समझती हैं और इसलिए उनके विषयों को बेहतर तरीके से उठा सकती हैं। डिजिटल युग के विषय में बिरला ने कहा कि इस युग में उत्कृष्ट जनप्रतिनिधि होने के लिए इन साधनों का अधिकतम उपयोग करना होगा। उन्होंने आगे कहा कि टेक्नोलॉजी के उपयोग से जनता के मुद्दों की जानकारी जनप्रतिनिधियों त्वरित गति से पहुंच सकता है।

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