
CEC के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका से बिहार में सियासी तेज, राजद नेता अमरेंद्र चौरसिया बोले – आयोग को प्राइवेट कंपनी बना दिया गया
मधुबनी, 26 सितंबर। मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में दायर याचिका ने बिहार की सियासत में हलचल तेज कर दी है। इस मामले पर राजद नेता अमरेंद्र चौरसिया ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि 13 करोड़ वोट काटकर लोकतंत्र को प्राइवेट कंपनी बना दिया गया है। CEC अकेले फैसले लें, यह लोकतंत्र नहीं तानाशाही है।वर्तमान मुख्य चुनाव आयुक्त लोकतंत्र के लिए खतरा बन गए हैं। उन्होंने मांग की कि ECINet सर्वर का फॉरेंसिक ऑडिट कराया जाए और उसके लॉग को सुरक्षित रखा जाए।
चौरसिया ने याचिका के हवाले से कहा कि जब दो चुनाव आयुक्त लिखित में 14 बार आपत्ति दर्ज करें और फिर भी अकेले फैसले लिए जाएं, तो यह आयोग नहीं रहा। नए मतदाता जोड़ने के लिए इस्तेमाल होने वाले वैधानिक फॉर्म-6 में तय प्रक्रिया के बिना बदलाव किया गया।मतदाता सूची का प्रबंधन केंद्रीकृत कर दिया गया, जबकि कानून में इसकी जिम्मेदारी ERO की है।
उन्होंने कहा कि मतदाता सूची से बड़ी संख्या में नाम हटने के दावे की स्वतंत्र जांच के लिए उच्चस्तरीय कमेटी का गठन होना चाहिए। सभी कथित एकतरफा फैसलों को रद्द घोषित किया जाना चाहिए। चौरसिया ने 2023 के नियुक्ति कानून का जिक्र करते हुए कहा कि साल 2023 से पहले CJI भी चयन समिति में होते थे, अब प्रधानमंत्री, नेता विपक्ष और एक केंद्रीय मंत्री हैं। जब नियुक्ति प्रक्रिया ही सरकार के अधीन होगी तो निष्पक्षता पर सवाल उठना लाजिमी है।
उन्होंने कहा कि 2023 में सुप्रीम कोर्ट ने अपने एक फैसले में कहा था कि चुनाव आयोग के फैसले में आम सहमति होनी चाहिए और इसी सिद्धांत का हवाला मौजूदा याचिका में दिया गया है। उन्होंने आरोप लगाया कि बिहार में SIR की प्रक्रिया से गरीब और वंचित वर्ग के मतदाताओं के नाम हटाए गए हैं और राजद इस मुद्दे को जनता के बीच ले जाती रही है।



