
जीवन की जटिलताओं को कलात्मक रूप से समझने में मदद करता नाटक : कुणाल
मधुबनी- 22 सितंबर। नाटक समाज का दर्पण और संस्कृति का संवाहक है। यह केवल मनोरंजन का साधन नहीं, बल्कि सामाजिक कुरीतियों पर प्रहार करने, ऐतिहासिक धरोहर को सहेजने और मानवीय मूल्यों को विकसित करने का एक सशक्त माध्यम है। उक्त बातें संगीत नाटक अकादमी सम्मान से राष्ट्रपति द्वारा सम्मानित रंगकर्मी कुणाल ने कही। वे राजनगर स्थित अरविंद पैलेस में लोकहित रंगपीठ सेवा संस्थान द्वारा आयोजित सम्मान समारोह में बोल रहे थे। संस्था के सचिव वरिष्ठ रंगकर्मी प्रो. महेन्द्र लाल कर्ण, प्रो. प्रवीण कुमार झा, वरिष्ठ संस्कृतिकर्मी विमल मस्कारा द्वारा उन्हें पाग, शॉल, मिथिला चित्रशैली में बनी नटराज की पेंटिंग एवं प्रशस्ति पत्र प्रदान कर रंग सम्मान से सम्मानित किया गया।
कुणाल ने कहा कि नाटक देखने और उसमें भाग लेने से लोगों में सहानुभूति, संवाद कौशल, आलोचनात्मक सोच और टीम भावना का विकास होता है। यह जीवन की जटिलताओं को कलात्मक रूप से समझने में मदद करता है। अरविंद परफार्मिंग आर्ट्स के तत्वावधान में अरविंद गुप्ता के निर्देशन में भारतेंदु हरिश्चंद्र लिखित नाटक ‘अंधेर नगरी’ का मंचन कुल 45 बाल एवं किशोर कलाकारों द्वारा किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ शिवलाल संगीत महाविद्यालय के छात्रों द्वारा अशोक कुमार सिंह के नेतृत्व में स्वागत गान से हुआ। अमित कुमार के निर्देशन में मिथिला लोककला मंच के कलाकारों ने झिझिया, जट-जटिन लोकनृत्य का भव्य प्रदर्शन किया।
मंच व्यवस्था सुमित कुमार ने संभाली, संचालन प्रमोद सर्राफ ने किया। कार्यक्रम में भारतीय जन नाट्य संघ (इप्टा) के राष्ट्रीय सचिव इंद्रभूषण रमन बमबम, मधुबनी इकाई के सचिव रंजीत कुमार, लोकरंग के निदेशक जटाधर पासवान, रंगरेज मिथिला के निदेशक साहित्य अकादमी सम्मानित ऋषि वशिष्ट, वरिष्ठ रंगकर्मी लेखक-निर्देशक श्याम भास्कर, कवि-चित्रकार विमल मस्कारा, प्रो. प्रवीण कुमार झा, अरविंद गुप्ता सहित अन्य ने हिस्सा लिया।



