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‘खेला होबे’ नारा खेल नहीं, राजनीतिक संदेश का प्रतीक, जमीन पर नहीं हुआ खेल का विकास: नितिन नवीन

कोलकाता- 09 अप्रैल। पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव के मद्देनजर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने कहा कि ‘खेला होबे’ का नारा वास्तविक खेल भावना को नहीं बल्कि राजनीति को दर्शाता है। उन्होंने आरोप लगाया कि पश्चिम बंगाल में खेलों का वास्तविक विकास नहीं हो रहा है और राज्य खेल प्रदर्शन के मामले में पीछे होता जा रहा है।

उत्तर बंगाल दौरे के दौरान नितिन नवीन ने गुरुवार को मालदा टाउन में खेल क्लबों और गैर-सरकारी संगठनों के प्रतिनिधियों के साथ बैठक की। इस दौरान उन्होंने आगामी विधानसभा चुनाव के मद्देनजर युवाओं और खेल संगठनों से संवाद भी किया।

तृणमूल कांग्रेस पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा कि जैसे ही चुनाव नजदीक आते हैं, ‘खेला होबे’ का नारा दिया जाता है, लेकिन जमीनी स्तर पर खेलों के विकास के लिए कोई ठोस काम नहीं दिखता।

उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि केंद्र सरकार की खेलो इंडिया और फिट इंडिया जैसी योजनाओं को राज्य में सही तरीके से लागू नहीं किया जा रहा है तथा केंद्र से मिलने वाली धनराशि का भी समुचित उपयोग नहीं हो रहा है।

नवीन ने कहा कि हरियाणा, गुजरात और बिहार जैसे राज्य खेल क्षेत्र में तेजी से आगे बढ़ रहे हैं, जबकि समृद्ध खेल परंपरा होने के बावजूद पश्चिम बंगाल पिछड़ रहा है।

उन्होंने मोहन बागान जैसे ऐतिहासिक खेल संस्थानों की विरासत का उल्लेख करते हुए कहा कि यदि राज्य में भारतीय जनता पार्टी की सरकार बनती है तो खेलों की खोई हुई प्रतिष्ठा को फिर से स्थापित किया जाएगा।

युवाओं को लेकर अपनी योजना बताते हुए उन्होंने कहा कि उनकी पार्टी खेलों के साथ-साथ संस्कृति, कला, साहित्य और पत्रकारिता के क्षेत्र में भी प्रतिभाओं को आगे बढ़ाने का काम करेगी।

मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर हमला करते हुए उन्होंने कहा कि जब देश फिट इंडिया अभियान के साथ आगे बढ़ रहा है, तब वह इसे अलग नजरिए से देखती हैं और घुसपैठियों को संरक्षण दे रही हैं, जिसे बंद किया जाना चाहिए।

उन्होंने कहा कि भारत वर्ष 2030 के राष्ट्रमंडल खेल और 2036 के ओलंपिक की मेजबानी के लिए प्रयास कर रहा है। यदि पश्चिम बंगाल में दोहरे इंजन की सरकार बनती है तो राज्य के युवाओं को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी प्रतिभा दिखाने का अवसर मिलेगा।

उन्होंने यह भी कहा कि राज्य में उद्योगों की गिरावट के कारण खेलों में कॉरपोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व के अंतर्गत होने वाला निवेश भी कम हुआ है।

अंत में उन्होंने कहा कि ‘खेला होबे’ खेलों का प्रतीक नहीं बल्कि चुनाव से पहले खेले जाने वाले राजनीतिक खेल का संकेत है, जो राज्य के स्वस्थ खेल वातावरण के लिए हानिकारक है।

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