
संयुक्त परिवार से बड़ा कोई धन नहीं, दुःख-सुख में एक-दूसरे का देते साथ
मधुबनी- 15 मई। ‘वसुधैव कुटुंबकम्’ यानी पूरी पृथ्वी हमारा परिवार है। परिवार के महत्व और उसकी उपयोगिता के उद्देश्य को लेकर 15 मई को अंतरराष्ट्रीय परिवार दिवस पर मैथिल विकास प्रतिष्ठान की परिचर्चा की गई। परिचर्चा को संबोधित करते हुए प्रतिष्ठान के उपाध्यक्ष मोद नारायण झा ने कहा कि आमतौर पर किसी भी परिवार के विकास के लिए प्रेम व एकता काफी अहम होता है। इसमें कमियां आने पर परिवार अशांति के दौर से जूझने लगता है। फिर संयुक्त परिवार की गरिमा बहाल रखने में भारी मशक्कत उठाना पड़ता हैं। हाईटेक हो चली व्यवस्था में परिवार की एकता बहाल रखना कम चुनौती भड़ा नहीं होता। बच्चों को बालिग होने की दहलीज पर पहुंचने के साथ विचारों में आ रही भिन्नता परिवार को खंडित होने के कंगार पर पहुंचा देता है। एक छत के नीचे रहने वालों की सोच में आ रही बदलाव से संबंधों के बीच दूरियां भी बढ़ने लगी।
उन्होंने कहा कि संयुक्त परिवार से बड़ा कोई धन नहीं होता हैं। पिता से बड़ा कोई सलाहकार नहीं होता हैं। मां के आंचल से बड़ी कोई दुनिया नहीं, भाई से अच्छा कोई भागीदार नहीं, बहन से बड़ा कोई शुभ चिंतक नहीं होता। संयुक्त परिवार के बिना खुशहाल जीवन की कल्पना नहीं की जा सकती है। परिवार से समाज और समाज से राष्ट्र बनता हैं। समाज में प्राचीन काल से ही संयुक्त परिवार की मान्यता रही है। संयुक्त परिवार में बुजुर्गों का समय काफी सुखमय गुजरता है।परिवार में खुशी, अनुशासन व आदर का माहौल बना रहता है।
हालांकि बदलते समय का असर संयुक्त परिवार की परंपरा पर भी दिखने लगा है। जिससे संयुक्त परिवारों का बिखराव होने लगा है। एकाकी परिवारों की जीवनशैली ने दादा-दादी और नाना-नानी की गोद में खेलने व लोरी सुनने वाले बच्चों का बचपन छीन गया है। पश्चिमी संस्कृति का प्रभाव से आधुनिक पीढ़ी बुजुर्गों व अभिभावकों के आदर के प्रति उदासीन हो गए है। माता-पिता अब उन्हें बोझ लगने लगे हैं।
संयुक्त परिवारों को बचाने के लिए एक स्वस्थ सामाजिक परिप्रेक्ष्य की आवश्यकता है।परिवार एक ऐसी सामाजिक संस्था है, जो आपसी सहयोग, समन्वय से चलता है। जिसमें सभी सदस्य आपस में मिलकर प्रेम,स्नेह का निर्वाह करते हैं। किसी भी सुखी-संपन्न एवं खुशहाल परिवार के संस्कार, मर्यादा, सम्मान, समर्पण,आदर,अनुशासन जरूरी होता हैं। संयुक्त परिवार सभी लोगों को जोड़े रखता है। दुःख-सुख में सभी एक-दूसरे का साथ देते हैं।



