
जकात-फितरे की रकम गरीबों पर खर्चकर रब को करें राजी : अमानुल्लाह खान
मधुबनी- 12 मार्च। रमजान और रोजे का मकसद अपने नफ्स पर मुकलम काबू पाना और दूसरों की जरूरत को पूरा करते हुए अपने अल्लाह को राजी करने की कोशिश करना है। रोजा रखनेवाला गरीबों की भूख की कैफियत से अगाह होता है। वहीं रोजेदार अपने नफ्स पर काबू पाकर बुराई बेहयाई, झूठ, मक्कारी, फरेब से बचता है। उक्त बातें अंजुमन इत्तेहाद-ए-मिल्लत के संयोजक तथा नगर निगम के उपमेयर अमानुल्लाह खान कहीं। उन्होंने कहा कि इस समय रमजान के समय रब को राजी करना जिदगी का मकसद होता है। रमजान के रोजे का असली मकसद अपने पड़ोस के गरीब, नदार, मजबूर, बेसहारा का मददगार बनना असल ईबादत है। जो लोग मुस्लिम मालदार है वो ईद के कपड़े और फिजुल खर्ची से बचकर गरीबों को जकात और फितरे की रकम उनपर खर्च कर अपने रब को राजी करें। अल्लाह तआला और अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहेवसलम ने ऐसे लोग पर बड़े सवाब की बसारत दी है जो गरीबों को खाना दे और मददगार रहें। वक्त हरपल इबादत और मदद करने का है अल्लाह तआला हमारे अमल को कबुलयात बख्से। आमीन।



