बिहारभारत

लोक आस्था का महापर्व छठ नहाय खाय के साथ शुरू

11 नवंबर को उगते सूर्य को अर्घ्य देने के साथ छठ पूजा का होगा समापन

पटना- 08 नवंबर। चार दिनों तक चलने वाला आस्था का महापर्व छठ आज नहाय-खाय के साथ शुरू हो गया। राजधानी पटना के अलावा राज्य के विभिन्न जिलों के घाटों पर इस अवसर पर छठव्रतियों और श्रद्धालुओं की बडी संख्या में भीड़ देखी जा रही है। किसी तरह का हादसा होने की स्थिति से निपटने के लिए घाटों पर बचाव टीम की तैनाती प्रशासन की ओर से की गयी है।

छठ व्रति गंगा स्नान के बाद अपने साथ गंगा जल ले गये, जिसका उपयोग पूजा, छठ का प्रसाद बनाने और सूर्य देव को जल अर्पण करने के किया जाता है। बिहार के अलावा झारखंड-उप्र. सहित पूरे देश में छठ महापर्व धूमधाम से मनाने की तैयारी आज से शुरू हाे गयी है। अब तो भारत के अलावा विदेशों में भी छठ महापर्व मनाया जाने लगा है याद वहां रहने वाले लोगों को भारत से छठ का प्रसाद भेजा भी जाने लगा है। छठ व्रत में नहाय-खाय (नहाने के उपरांत भोजन) के दूसरे दिन खरना जिसमें खीर भोजन या अरवा चावल और सेन्धा नमक से बने नमकीन प्रसाद शाम को ग्रहण करने का नियम से इससे पूर्व छठ व्रति पूरे दिन निर्जला व्रत पर रहती है । इसके अगले दिन छठी भईया को प्रसाद के तौर पर चढ़ाने के लिए ठकुआ बनाया जाता है। आम तौर पर शुरू से ही लोग आम लकडी से चूल्हें पर ठकुआ बनाते है लेकिन आधुनिकता की ओर बढ़ते हुए गैस का उपयोग भी किया जाने लगा है ।

प्रसाद तैयार हो जाने पर दउरी और सूप सजा कर लोग नदियों, तलाबों या अपने घर में बने तालाब रूपी स्थान को घाट मानकर डूबते सूरज और फिर अगले दिन उगते सूरज को अर्घ्य देते है । छठ पर्व पर महिलाएं छठी मैय्या से संतान की प्राप्ति और संतान की लंबी उम्र की कामना करती हैं। छठ पूजा में छठ का प्रसाद काफी महत्वपूर्ण माना जाता है। महिलाएं के साथ ही पुरुष भी इस व्रत का पालन करते हैं। चार दिवसीय महापर्व छठ की शुरुआत इस साल नहाय खाय के साथ 8 नवंबर से हो रही है जबकि 11 नवंबर को उगते हुए सूर्य को अर्घ्य देने के साथ छठ पूजा का समापन होगा। छठ व्रत में डूबते सूरज और फिर उगते सूरज को अर्घ्य दिया जाता है। 8 नवंबर को नहाय खाय से छठ पूजा की शुरुआत है, 9 नवंबर को छठ पर्व खरना होगा और 10 नंवबर को डूबते सूर्य को अर्घ्य दिया जाएगा, 11 नवंबर को उगते हुए सूर्य को अर्घ्य देने के साथ ही छठ पूजा का समापन हो जाएगा। चार दिनों तक चलने वाले इस छठ महापर्व को लेकर शहर के बाजार भी सूप, दउरी, दीया, चारमुखी दीया, हाथी, मिटटी के बने चूल्हे, आम की लकडी, विभिन्न प्रकार के फल,धागा के बने माला सहित अन्य समाग्री से बाजार पट गया है । इसके बाजार से ही शहर की चमक भी बढ गयी है।

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