बिहार

महामना मालवीय के जयंती पर डिप्टी सीएम ने कुमार कपिलेश्वर सिंह को किया सम्मानित

पटना-25 दिसंबर। महामना मालवीय मिशन बिहार इकाई के द्वारा मालवीयजी की 160वीं जयंती अशोका हॉल,मौर्या होटल, पटना में शनिवार को महाराजाधिराज रामेश्वर सिंह बहादुर,जिनका योगदान बनारस हिंदू विश्वविद्यालय को बनाने में अभिन्न रहा है। उनके प्रपौत्र कुमार कपिलेश्वर सिंह को बिहार के उपमुख्‍यमंत्री तारकिशोर प्रसाद द्वारा सम्मानित किया गया।

मौके पर उप मुख्यमंत्री ने कहा कि दरभंगा राज परिवार का योगदान पूरे भारत में हर क्षेत्र में रहा है,जहां तक मुझे जानकारी है मैं आपके समक्ष यह कहना चाहता हूं कि शिक्षा,स्वास्थ्य,परिवहन उद्योग आप यूं कहें कि दसों दिशाओं में इस परिवार ने अपने खुले हाथ से भारत को सीचने का काम किया है। स्कूल से लेकर महाविद्यालय एवं महाविद्यालय से लेकर विश्वविद्यालय तक को खड़ा करने में इस परिवार का अहम योगदान है। ऐसा परिवार जिसने भारत को शिक्षित एवं भौतिक गुणों से सरोबार किया,उन्हें मैं नमन करता हु।

सम्मान पाने के उपरांत कुमार कपिलेश्वर सिंह ने सदन को संबोधित करते हुए कहा कि महामना पं. मदनमोहन मालवीयजी की 160वीं जयन्ती पर आयोजित महामना मालवीय मिशन के इस कार्यक्रम में मुझे आमन्त्रित और सम्मानित किये जाने पर मैं दरभंगा राजपरिवार की ओर से मिशन-परिवार को हार्दिक धन्यवाद और अपनी शुभकामनाएँ देता हूँ एवं मैं भारत-रत्न महामना पण्डित मदनमोहन मालवीयजी की 160वीं जयन्ती पर उनको शत-शत नमन करता हूँ। महामना मालवीयजी भारत की उन महान् विभूतियों में से एक हैं, जिन्होंने राष्ट्र-निर्माण का सपना देखा और उसे मूर्तरूप प्रदान किया। मालवीयजी एक व्यक्ति नहीं बल्कि एक संस्था थे। उन्होंने बहुत-सी संस्थाओं की नींव डाली।

काशी हिंदू विश्वविद्यालय उनमें से एक है। भारतीय शिक्षा-क्रान्ति के अग्रदूत मालवीयजी कहा करते थे कि ‘‘मुझे इत्र की गन्ध पसन्द नहीं, मुझे शील की गन्ध, चरित्र की गन्ध,धर्म की गन्ध,सबसे अधिक काशी हिंदू विश्वविद्यालय की सुगन्ध पसन्द है।’’ काशी हिंदू विश्वविद्यालय, मालवीयजी का प्राण था। तथा मालवीयजी काशी हिंदू विश्वविद्यालय के प्राण थे। इस विश्वविद्यालय को बनाने और सँवारने में मालवीयजी ने देश के सभी प्रमुख राजघरानों और आम जन से आर्थिक सहयोग लिया। मुझे आपको यह बतलाने में गर्व की अनुभूति होती है कि काशी हिंदू विश्वविद्यालय योजना के सर्वप्रथम संरक्षक दरभंगा के तत्कालीन महाराजाधिराज अर्थात् मेरे परदादा सर रामेश्वर सिंह बहादुर थे जिन्होंने हिंदू यूनिवर्सिटी सोसायटी के अध्यक्ष के रूप में काशी हिंदू विश्वविद्यालय परियोजना को अपना वरदहस्त,अपने जीवन के अन्तिम दिन तक प्रदान किया। यही नहीं, विश्वविद्यालय के मार्ग में आ रही सरकारी रुकावटों को उन्होंने तत्कालीन वायसराय लॉर्ड हार्डिंग और तत्कालीन शिक्षा-सचिव सर हरकोर्ट बटलर से अनेक बार मिलकर और सैकड़ों पत्र लिखकर दूर किया महामना मालवीय मिशन के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष इंजी.हरिशंकर सिंह जी साक्षी हैं जिनको दरभंगा राजपरिवार ने पं.मदनमोहन मालवीयजी से जुड़े वे सभी दस्तावेज़ उपलब्ध कराये हैं,जो हमारे पास विगत सौ वर्ष से अधिक समय से सुरक्षित थे। मुझे विश्वास है कि महामना मालवीय मिशन द्वारा पं. मदनमोहन मालवीयजी के समस्त साहित्य के प्रकाशन का जो बीड़ा उठाया गया है,उसमें हमारे द्वारा प्रदान की गई सामग्री का समुचित उपयोग होगा।

दरभंगा-राजपरिवार इस परियोजना हेतु आर्थिक सहयोग प्रदान करने के लिये भी कृत्संकल्पित है। इस महान् परियोजना को मेरी ओर से हार्दिक शुभकामनाएँ। मालवीयजी के अन्य बहुत-से कार्य हैं जिनमें एक हरिद्वार में गंगा पर बाँध बनाकर उसकी धारा को रोके जाने का विरोध है। इस कार्य में भी तत्कालीन महाराजा दरभंगा ने उनका पूरा-पूरा साथ दिया था। मेरे पितामह महाराजाधिराज सर कामेश्वर सिंह ने बीएचयू के प्रो चांसलर के रूप में विश्वविद्यालय की जो सेवा की, उसे भी स्मरण रखना आवश्यक है। महामना मदनमोहन मालवीय जी का नाम जितना बड़ा है, उससे कहीं बड़ी इनकी उपलब्धियाँ और योगदान हैं, जिसको शब्दों में व्यक्त करना आसान काम नहीं है। इसीलिए कविवर रवीन्द्रनाथ ठाकुर ने इन्हें सबसे पहले ‘महामना’ के नाम से पुकारा। महात्मा गांधी जिनको ‘भारतभूषण’ और अपना बड़ा भाई कहा करते थे। यह एक विडम्बना ही कही जाएगी कि भारतीयता का सच्चा प्रतिबिम्ब यह युगपुरुष आजीवन देशसेवा में समर्पित रहा,परन्तु स्वतन्त्र भारत में साँस लेने का सौभाग्य उन्हें प्राप्त नहीं हुआ। 12 नवम्बर, 1946 को महामना मालवीयजी हमें छोड़कर चले गए। परन्तु हमें आगे बढ़ने का पथ बतला गए। महामना मालवीयजी का जीवन करोड़ों भारतीयों के लिए प्रेरणादायक है। तथा भारत सदा उनका ऋणी रहेगा। वर्ष 2015 में भारत सरकार ने उनको ‘भारत-रत्न’ से सम्मानित अवश्य किया है। परन्तु महामना की कीर्ति को स्थायी रूप देने का कार्य महामना मालवीय मिशन कर रही है। कुमार ने कहा कि मुझे जानकारी दी गई है कि देशभर में फैली मिशन की 28 शाखाएँ मालवीयजी के सपनों को साकार करने के कार्य में जुटी हैं और अनेक प्रकार के सेवा-प्रकल्प चला रही हैं। आज मालवीयजी की 160वीं जयन्ती पर हमें उनके पदचिह्नों का अनुसरण करने का संकल्प लेकर उसपर आगे बढ़ना होगा,यही उन महामानव को हमारी सच्ची श्रद्धांजलि होगी। मंच पर विराजमान बिहार के माननीय उपमुख्‍यमंत्री तारकिशोर प्रसाद, महामना मालवीय मिशन के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष इंजी.हरिशंकर सिंह,मिशन की बिहार इकाई के अध्यक्ष उदय सिंह,कार्यकारी अध्यक्ष बिपिन कुमार सिंह,महामंत्री रवीन्द्र उपाध्याय व अन्य सम्मानित बन्धुओ तथा सभागार में उपस्थित माताओं,बहनों एवं सज्जनों को इस कार्यक्रम को सफल बनाने में जो अपना योगदान दिया उन्हें प्रणाम करता हु।

Join WhatsApp Channel Join Now
Subscribe and Follow on YouTube Subscribe
Follow on Facebook Follow
Follow on Instagram Follow
Follow on X-twitter Follow
Follow on Pinterest Follow
Download from Google Play Store Download

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button