
मधुबनी। भारत नेपाल अंतरराष्ट्रीय सीमावर्ती शहर जयनगर में महामारी की तरह लाॅटरी का गोरख धंधा बङे पैमाने पर फैल रहा है। प्रशासन और सफेदपोश के संरक्षण में करोड़ों रुपये का कारोबार प्रत्येक महिना किया जा रहा है।महिना चूंगी देकर शहरी क्षेत्र के विभिन्न जगहों पर छोटे बड़े लाॅटरी कारोबार माफियाओं के द्वारा प्रतिबंधित लाॅटरी की बिक्री खुलेआम किया जा रहा है। हालांकि इन सभी बातों की जानकारी स्थानीय प्रशासन को होने के बावजूद कारवाई करने में विफल है। जानकार सूत्रों ने बताया कि जयनगर शहरी क्षेत्रों में तीन बङे लाॅटरी सिंडिकेट के माध्यम से छोटे व्यापारी व सङक छाप लोगों को लाॅटरी बेचने के लिए दिया जाता है। सूत्रों ने बताया कि कोरोना महामारी का मार झेल चुके लोग फर्स से अर्श तक पहुंचने के लिए लाॅटरी के महाजाल में फंस कर अपना सब कुछ लुटा लेता है। गरीबी और तंगी से उबरने के लिए लोग लखपति से खाकपति बन रहे हैं। बावजूद लोग लाॅटरी के इस खेल में प्रति दिन अपने भाग्य को आजमा रहे हैं। सूत्रों ने बताया कि जयनगर शहरी क्षेत्र के महावीर चौक, रेलवे स्टेशन रोड के एक मार्केट, सोना पट्टी, भेलवा चौक, शहीद चौक एवं सहारा इंडिया गली में लाॅटरी सिंडिकेट के द्वारा प्रत्येक दिन लाखों रुपये की लाॅटरी बेची जा रही है। सूत्रों ने बताया कि प्रशासन के निचले स्तर के कर्मी के माध्यम से लाॅटरी माफियाओं से महिना वसूल कराया जाता है। बता दें कि जयनगर में सिगम स्टेट, सिक्किम स्टेट, भुटान स्टेट और लोकल छपी लाॅटरी की बिक्री धङल्ले से किया जा रहा है।इन सभी का मुख्यालय मधुबनी जिले के पंडौल और मुजफ्फरपुर है। प्रत्येक दिन तीन ड्रा होता है। दोपहर 1,6 एवं रात 8 बजे में होता है। प्रति दिन जयनगर में दस से बीस लाख रुपये तक की लाॅटरी का अवैध धंधा होता है। अवैध लाॅटरी के धंधा को महिला व पुरुष के साथ नाबालिग युवकों के द्वारा खरीद बिक्री की जाती है। बावजूद हर बिन्दुओं पर प्रशासन को जानकारी होती है पर कार्रवाई नहीं किया जाता है। ऐसे अवैध लाॅटरी धंधा करने वाले माफियाओं पर प्रशासन द्वारा कारवाई नहीं करने के पिछे की मंशा क्या हो सकती है आप खुद अंदाजा लगा सकते हैं। करोड़ों की इस अवैध कारोबार में लाॅटरी माफियाओं ने विगत कुछ वर्षों में करोड़ों रुपये अर्जित किए हैं।



