
अमित शाह ने सीआरपीएफ से कहा,आतंकवादियों से एक-एक व्यक्ति को बचाना हमारी जिम्मेदारी
नई दिल्ली- 25 अक्टूबर । केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने तीन दिवसीय कश्मीर दौरे के अंतिम दिन सुरक्षा बलों के एक महत्वपूर्ण सम्मेलन को संबोधित किया। यह सम्मेलन पुलवामा जिले के केन्द्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) के कैम्प में आयोजित किया गया था। सम्मेलन में जम्मू-कश्मीर की सुरक्षा में जुटे सेना, सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ), सीआरपीएफ, एसएसबी, सीआईएसएफ और जम्मू-कश्मीर पुलिस के चुनिंदा जवानों को बुलाया गया था। अमित शाह अपने दौरे की अंतिम रात सीआरपीएफ कैंप में ही बिता रहे हैं। मंगलवार की सुबह वे इस कैम्प में ही स्थापित शहीद स्मारक पर देश के लिए बलिदान देने वाले जवानों को प्रतीकात्मक रूप से श्रद्धांजलि देकर दिल्ली के लिए रवाना होंगे।
आशंकाएं की निर्मूल
सुरक्षा बलों को संबोधित करते हुए गृहमंत्री ने कहा कि दिल की बात कहूं तो तीन दिवसीय दौरे का यही सबसे महत्वपूर्ण कार्यक्रम है। उन्होंने सुरक्षा बलों के साहस, शौर्य, धैर्य के साथ पराक्रम की प्रशंसा करते हुए कहा कि यदि आप लोग न होते तो अनुच्छेद 370 और 35 ए हटाने के बाद जितनी आशंकाएं व्यक्त की जा रही थीं, वे गलत साबित न होतीं। यह सुरक्षा बलों की सुझबूझ का ही नतीजा है कि बिना एक भी गोली चलाए, बिना रक्त बहाए कश्मीर देश की मुख्य धारा में शामिल हो गया है और यहां विकास का कार्य तेज गति से चल रहा है। गृहमंत्री ने कहा कि जब वे गुजरात राज्य के गृहमंत्री थे तब भी पाकिस्तान से लगने वाली सीमा का कार्य देखते थे। कच्छ क्षेत्र में हरामी नाला की सुरक्षा का जटिल, दुर्गम और दुरूह कार्य जैसे सुरक्षा बल करते थे, तभी से उनके मन में जवानों के प्रति श्रद्धा का भाव है। उन्होंने कहा कि देश का विकास तभी हो सकता है जब शांति और सुरक्षा का वातावरण हो। यह शांति और सुरक्षा की गारंटी केवल देश का जवान ही दे सकता है।
आतंकवाद के खिलाफ जीरो टालरेंस
उन्होंने कहा कि जम्मू-कश्मीर में पहले की अपेक्षा काफी शांति है। आतंकवादियों द्वारा सुरक्षा बलों और आम नागरिकों को निशाना बनाए जाने के आंकड़े कम हुए हैं लेकिन हमें इससे संतुष्ट नहीं हो जाना है। हम चाहते हैं कि एक भी निर्दोष आदमी की जान न जाए। आतंकवाद के खिलाफ मोदी सरकार जीरो टालरेंस की नीति पर चल रही है। उन्होंने सुरक्षा बलों से कहा कि आप अपना काम मुस्तैदी से कर ही रहे हैं। आतंकवादियों से एक-एक व्यक्ति को बचाना हमारी जिम्मेदारी है।
आयुष्मान कार्ड की सौगात
गृहमंत्री ने कहा कि हमने सुरक्षा बलों के जीवन में आने वाली परेशानियों को समझा है और उन्हें दूर करने के प्रयास भी किए हैं। सारी समस्याएं दूर हो गई हैं, ऐसा नहीं है। पर हाल ही में हमने सुरक्षा बलों को दो आयुष्मान कार्ड देने के महत्वपूर्ण निर्णय को अंतिम रूप दे दिया है। इनमें से एक कार्ड जवान के पास रहेगा और दूसरा कार्ड उसके परिवार के पास। यदि जवान सीमा पर या किसी भी मोर्चे पर तैनात है और उसके परिवार में स्वास्थ्य संबंधी कोई परेशानी आती है तो उसे परेशान नहीं होना होगा। न बिल का झंझट और न उसे पास कराने की कोई प्रक्रिया। उस एक कार्ड से उसके परिजनों का किसी भी अस्पताल में इलाज हो जाएगा और उसे कोई पैसा नहीं देना होगा। जवानों के प्रति हमारी सरकार बहुत संवेदनशील है।



