बिहार

MADHUBANI:- सेविका-सहायिकाओं ने बैठक के बाद की घोषणा, कहा- मांगें पूरी होने तक ही खुलेगा आंगनबाड़ी केंद्रों का ताला

मधुबनी- 30 नवबंर। बेनीपट्टी प्रखंड कार्यालय के निकट गुरुवार को बिहार राज्य आंगनबाड़ी कर्मचारी यूनियन एटक के बेनीपट्टी इकाई की बैठक यूनियन की जिला महासचिव शबनम झा की अध्यक्षता में हुई. जिसमें बिहार राज्य आंगनबाड़ी संयुक्त संघर्ष समिति के आह्वान पर सेविका सहायिका को सरकारी कर्मचारी का दर्जा देने समेत 5 सूत्री मांगों को लेकर बीते 29 सितंबर से जारी हड़ताल व आंदोलन की समीक्षा की गई और आगे की रणिनीति बनाई गई. बैठक में मौजूद सेविका और सहायिकाओं ने नीतीश सरकार व मोदी सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की और सरकार व पदाधिकारियों द्वारा की जा रही दमनात्मक कार्रवाई की घोर निंदा की गई. इसके साथ ही पटना में आहूत डेरा डालों घेरा डालों धरना प्रदर्शन कार्यक्रम के दौरान लाठीचार्ज में घायल होने के बाद अपनी शहादत देनेवालीं सेविका व सहायिकाओं के निधन पर दो मिनट का मौन धारण कर शोक संवेदना व्यक्त की गई. बैठक में मौजूद सेविका सहायिकाओं ने एक मत से निर्णय लिया कि चाहे जो भी कार्रवाई हो लेकिन सेविका सहायिकाओं की मांगें पूरी नही होने तक आंगनबाड़ी केंद्रों से ताले नही खुलेंगे. इस दौरान जिला महासचिव शबनम झा ने कहा कि सरकार सेविका सहायिकाओं के आंदोलन को कुचलने की मंशा से पटना में हजारों महिलाओं पर पानी, लाठी चार्ज व आंसू गैस बरसाकर घायल करवा दी, जिसके कारण एक सेविका एवं तीन सहायिकाओं की मौत हो गई. अवैध तरीके से करीब 20 हजार से अधिक सेविका सहायिकाओं को चयनमुक्त करने का काम किया गया है, जो हमारा संगठन किसी भी सूरत में होने नही देगा. लगभग 25 सौ महिला व पुरुषों पर प्राथमिकी दर्ज करवाई गई है लेकिन तमाम दमनात्मक कार्रवाई के बावजूद सेविका सहायिकाएं हड़ताल पर डटीं हुईं ही हैं. इस हिटलरशाही से सेविका सहायिका डरनेवाली नही है और सूबे की सभी सेविका सहायिका अपने जायज मांगों को लेकर सभी मुख्य सड़कों को जाम करेंगी और सभी परियोजना कार्यालय में तालेबंदी भी करेगी. सरकार को हमारी उचित मांगे माननी ही पड़ेगी. वक्ताओं ने कहा कि राज्य व केंद्र की सरकार आंगनबाड़ी सेविका सहसयिकाओं के साथ भेदभादपूर्ण व्यवहार कर रही है, जिसे अब सेविका-सहायिका बर्दास्त नही करेगी. जिला परियोजना से लेकर राज्य भर की सभी सेविका सहायिकाओं का जीवन सरकार की गलत नीतियों के कारण दूभर हो गया है. चाहे जो भी कार्रवाई हो लेकिन इस बार सेविका सहायिकाएं करो या मरो के नारे के साथ आर-पार की लड़ाई लड़ने को तैयार है और जब तक मांगे पूरी नही हो जाती तब तक केंद्रों से ताले नही खोले जायेंगे. भलाई इसी में है कि सरकार जल्द से जल्द सेविका सहायिकाओं की मांगे मान कर केंद्र पर लटके ताले को खोलवाने का काम करें. बैठक में मौजूद सेविका सहायिकाओं ने मांगे पूरी होने तक हड़ताल पर डटे रहने और जरूरत पड़ने पर सामूहिक इस्तिफा देने का भी संकल्प लिया. वक्ताओं ने यह भी कहा कि 29 नवंबर से 8 दिसंबर तक पूनः परियोजना स्तर पर धरना प्रदर्शन एवं 1 एवं 2 दिसंबर को क्षेत्रीय विधायक व सांसदों के सामने जबाब मांगों प्रदर्शन, 10 दिनों के अंदर सरकार चयनमुक्ति की कार्रवाई को रद्द करके वार्ता को तैयार नही हुई तो मंत्रियों के घर के आगे भूख हड़ताल पर बैठने को सेविका सहायिकाएं बाध्य होगी. विभिन्न राजनीतिक दलों ने भी सेविका सहायिकाओं के साथ सरकार द्वारा किये जा रहे हो कार्रवाई व सरकार की हठधर्मिता को अन्यायपूर्ण कार्रवाई कहा है. मौके पर रीता देवी, विभा देवी, रंजू देवी, मिथिलेश देवी, मोहसिना खातून, संरक्षक लोकनाथ झा, राजकुमार पासवान, राम विलास ठाकुर, संजय महतो, उपेंद्र पासवान, कृष्णदेव यादव, आरके निराला, दिनेश राय, जयनारायण मंडल, बिपीन सिंह, भोगेंद्र सिंह, ऋषि झा, सुशील सहनी, सुनील यादव, मो. नासिर, विनय झा, मो. मोतीउर्ऱ रहमान, मो. जाकिर हुसैन, मो. निराले, मुकेश कुमार व समेत अन्य सेविका सहायिकाएं भी मौजूद थे.

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