
महाशिवरात्रि पर रुद्राभिषेक का बड़ा महत्व: पं. अभिषेक शास्त्री जी महाराज
मधुबनी- 15 फरवरी। सनातन धर्म में धार्मिक साधना के विभिन्न आयाम हैं। जगत में सत्यम शिवम सुन्दरम की परिकल्पना को धरातल पर साकार करने के लिए भगवान भोलेनाथ की पूजा करना आवश्यक है। महाशिवरात्रि पर रुद्राभिषेक एक महत्वपूर्ण माध्यम है। उक्त बातें पं. अभिषेक शास्त्री जी महाराज ने कहीं। महाशिवरात्रि पर रुद्राभिषेक की महत्ता पर चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि भगवान भोलेनाथ का रूद्राभिषेक से संपूर्ण जगत का कल्याण होता है।
सनातन धर्म में भगवान शिव के रुद्र के साथ-साथ उनके सभी अवतारों की चर्चा करते हुए कहा कि भगवान रुद्र समस्त संसार के पालन-पोषण तथा संहार की शक्ति के स्वामी हैं। यजुर्वेद में रुद्राभिषेक की महिमा का बड़ा उल्लेख मिलता है। भगवान शिव की पूजा के कई विधान है। उसमें रुद्राभिषेक अत्यंत लाभकारी है। शिव को रुद्र की संज्ञा दी गई है। रुद्राभिषेक से शिव का विशेष अनुग्रह प्राप्त होता है। जल से रुद्राभिषेक से वर्षा, कुश से रुद्राभिषेक से असाध्य रोगों पर विजय, दही से रुद्राभिषेक से वाहन सुख, गन्ने के रस, शहद व घी से रुद्राभिषेक करने पर धन लाभ की प्राप्ति होती है।
तीर्थों के जल से रुद्राभिषेक से मोक्ष, इत्र वाले जल से रोगों से छुटकारा, दूध से रुद्राभिषेक करने वाले को संतान सुख मिलता है। गाय दूध से रुद्राभिषेक से संतान दीर्घायु होती है। बर्फ के जल या गंगाजल से रुद्राभिषेक करने पर ज्वर शांत होता है। सहस्त्रनाम जाप के साथ घी की धारा का रुद्राभिषेक करने पर वंश का विस्तार होता है। दूध की धारा से रुद्राभिषेक से शांति, शक्कर मिश्रित दूध से रुद्राभिषेक पर शत्रु पराजित होते हैं। गाय दूध, घी मिलाकर रुद्राभिषेक से आरोग्यता का वरदान मिलता है। शक्कर मिश्रित जल से रुद्राभिषेक करने पर पुत्र रत्न की प्राप्ति होती है।



