
MADHUBANI:- जल संरक्षण ही नहीं, यहां तालाब की मनाई जाती महोत्सव
--- कुछ वर्षों पूर्व तक प्रवासी पक्षियों का होता था बसेरा
मधुबनी- 15 फरवरी। दो बहन जानो व मानो के नाम पर जिले के लखनौर प्रखंड के कछुआ गांव स्थित एक तालाब का पांच दिवसीय महोत्सव प्रत्येक साल गंगा दशहरा के दिन से शुरु की जाती है। तालाब की पूजा अर्चना की जाती है। इसकी जल की पवित्रता, तालाब के संरक्षण का प्रयास इस तालाब की धार्मिक महत्व का संदेश देता है। यह तालाब और इसके एक भिंडा पर दो बहन जानो-मानो की मंदिर को पर्यटन स्थल के रूप में दर्जा देने का अभियान दशको से चल रहा है।आधुनिक युग में तालाबों के समाप्त हो रहे अस्तित्व के बीच जल संरक्षण के लिए जानो-मानो तालाब में स्नान करने के लिए गंगा दशहरा के दिन जिलेभर के अलावा नेपाल से बड़ी संख्या में लोग पहुंचते है। जानो-मानो महोत्सव समिति ट्रस्ट के ट्रस्टी सरोज मोहन झा ने बताया कि कछुआ की धरोहर माने जाने वाले इस तालाब को सहेजने में यहां के लोग सालों से जुटे है।
तालाब के जल की पवित्रता बचाने के लिए जिलाधिकारी को कई बार आवेदन दिया है। तालाब में मछली पालन के लिए कैमिकल युक्त दवाओं का उपयोग जल को नुकसान पहुंच सकता है। उन्होंने बताया कि 13वीं सदी से यह तालाब शुभ कार्यों से पशुओं को पीने का काम आता है। कुछ वर्षों पूर्व तक विदेशी पक्षियों का बसेरा होता था। प्रत्येक शनिवार, रविवार को जिला व नेपाल के सैकड़ों परिवार अपने बच्चों को नहलाने के लिए पहुंचते है। मान्यता है इस तालाब में स्नान कराने से बच्चों की कई बीमारी ठीक हो जाती है। तत्कालीन विधान पार्षद सुमन कुमार महासेठ पर्यटन मंत्री जानो-मानो तालाब व कल्याणी मां मंदिर को पर्यटन स्थल का दर्जा देने की मांग की गई थी। जिसके आलोक में तत्कालीन पर्यटन मंत्री प्रमोद कुमार द्वारा जानो-मानो तालाब व कल्याणी मां मंदिर क्षेत्र के विकास के लिए राशि की उपलब्धता के आधार पर सुविधाओं का विकास का आश्वासन दिया गया था।



