
अमेरिका और रोमानिया दूतावास की मदद से गिरफ्तार हुए आरोपित
नई दिल्ली-25 दिसंबर। केंद्रीय गृह राज्य मंत्री अजय मिश्रा टेनी से ब्लैकमेलिंग के मामले में गिरफ्तार हुए आरोपितों ने पूछताछ में कई खुलासे किए हैं। आरोपित पुलिस से बचने के लिए इंटरनेट कॉलिंग का इस्तेमाल कर रहे थे। छानबीन कर रही पुलिस ने अमेरिका एवं रोमानिया दूतावास की मदद से इनकी लोकेशन का पता लगाया और पांचों को कॉल सेंटर से गिरफ्तार कर लिया। फिलहाल पुलिस आरोपितों को तीन दिन के रिमांड पर लेकर पूछताछ चल रही है।
पुलिस के अनुसार,पूछताछ में आरोपितों ने बताया कि उन्होंने पहली कॉल 17 दिसंबर को अजय मिश्रा टेनी के पीए को की थी। इसमें उन्होंने घटना का वीडियो फुटेज जारी करने की धमकी देकर दो करोड़ रुपये की मांग की थी। आरोपितों ने पीए को मिनिस्टर से बात कराने के लिए कहा था, लेकिन उन्होंने नहीं कराई थी। छानबीन के दौरान पुलिस को पता चला कि यह कॉल इंटरनेट कॉलिंग के जरिए की जा रही है। 17 से 23 दिसंबर के बीच आरोपितों द्वारा कुल 40 धमकी भरे कॉल किये गये थे। नोएडा सेक्टर 15 के एक पार्क से आरोपित कॉल करते थे। गुरुवार की दोपहर भी उन्होंने ऐसी ही एक कॉल कर दो करोड़ रुपये मांगे थे।
जाच में नॉर्थ एवेन्यू पुलिस को पता चला कि वह अमेरिका और रोमानिया के गेट पास का इस्तेमाल कर रहे हैं, इसलिए दिल्ली में मौजूद इनके दूतावास की मदद ली गई। इससे पता चला कि वह कहां से कॉल कर रहे हैं। उन्हें पता चला कि अमित कुमार नोएडा में कॉल सेंटर चलाता है। इसके बाद वहां छापा मारकर पांच आरोपितो को गिरफ्तार किया गया। आरोपित अमित कुमार, अमित, कबीर वर्मा, निशांत कुमार और अश्वनी कुमार से फिलहाल पूरे मामले को लेकर पूछताछ चल रही है।
अमित कुमार ने पुलिस को बताया कि उसका दोस्त कबीर इंश्योरेंस एजेंट का काम करता था। उसने कुछ दिन पहले मंत्री से जबरन उगाही की साजिश रची। कबीर के पास दो असिस्टेंट थे जिनका नाम अमित माझी और निशांत है। यह दोनों मिश्रा के ऑफिस से कॉल करते थे। लगभग 85 फ़ीसदी कॉल निशांत द्वारा की गई थी जबकि अमित द्वारा 15 फीसदी कॉल की गई थी। उन्हें प्रत्येक कॉल के 10 हजार रुपये देने की बात कही गई थी। गिरफ्तार किया गया। वहीं अश्वनी एक टेक्निकल एक्सपर्ट है और वहीं इंटरनेट कॉलिंग करवाता था। कबीर ने पुलिस को बताया है कि लखीमपुर खीरी हिंसा से उसे यह आइडिया आया था।



