
राजनगर का राज महल देखकर उत्साहित हुए गुजरात के वड़ताल स्वामीनारायण मंदिर के नौतम स्वामी, कहा-राजनगर में पर्यटन की असीम संभावनाएं
मधुबनी-23 दिसंबर। नौतम स्वामी,वड़ताल स्वामीनारायण मंदिर (गुजरात) के नौतम स्वामी आज एक दिवसीय दौरे पर कुमार कपिलेश्वर सिंह के साथ मिथिलांचल के मधुबनी जिला के राजनगर पहुंचे। पहुंचते ही इस खंडहर राजनगर महल के अवशेषों को देखकर उत्साहित हो गए। यहां उन्होंने महाराज रामेश्वर सिंह द्वारा स्थापित मंदिरों में जाकर देवी देवताओं के दर्शन किये। उन्होंने कहा कि यहाँ महाराज द्वारा बनाये गए मन्दिरों में पूरे भारत के मंदिरों की झलक देखने को मिलती है,यहां पूरे भारत,विदेशों से पर्यटकों की आने की असीम संभावनाये दिखती है जिससे इस क्षेत्र का पर्यटन विकास हो सकेगा।

उन्होंने महाराजा रामेश्वर सिंह के विषय में कहा कि सनातन धर्म के लिए उनका योगदान अमूल्य रहा है,राज परिवार को मैं ऐसे महान कार्यों के लिए प्रणाम करता हूं और आशा भी करता हूं आगे भी उनके द्वारा सनातन धर्म को सहयोग मिलता रहेगा। ऐसे कार्यों में मेरा भी सतत सहयोग रहेगा। उन्होंने कहा कि इस क्षेत्र में एक सूर्य मंदिर का निर्माण होना चाहिए जिसमें मैं यह अपेक्षा करता हूं कि इस संदर्भ में भारत सरकार एवं राज परिवार के बीच बात को रखी जाए। तथा इसका निर्माण जल्द ही किया जाए। कुमार कपिलेश्वर सिंह के संदर्भ में उन्होंने कहा कि उनके साथ मेरा प्रेम,आत्मीय मुलाकात है जो मुझे यहां राजनगर मधुबनी तक खींच लाई। मैं चाहता हूं कि वर्ष में एक बार जरूर इस राज परिवार के दैविक स्थान का भ्रमण करु। मेरा सहयोग हमेशा इस क्षेत्र के विकास, सनातन धर्म के विकास के लिए रहेगा।
इस अवसर पर राज परिवार के कुमार कपिलेश्वर सिंह ने कहा कि स्वामी जी का आना अपने आप में अलौकिक है क्योंकि ऐसे महापुरुषों का ऐसे स्थल पर आना कई प्रकार के शुभ संकेत का होना है। मैं बिहार सरकार एवं भारत सरकार से भी अनुरोध करना चाहूंगा कि जल्द से जल्द इस स्थल को पर्यटन स्थल बनाने में हमारा सहयोग करें,विकसित करने में हमारा सहयोग करें। इस दौरान परिसर में राजाबहादुर विशेश्वर सिंह की प्रतिमा पर मालार्पण की गया। साथ ही स्वामी जी को कुमार कपिलेश्वर सिंह द्वारा राज परिवार के प्रतीक चिन्ह भेंट की गयी।
कार्यक्रम के दौरान हेरिटेज फोटोग्राफर दोष कुमार के द्वारा राजनगर परिसर की 120 साल पुरानी तस्वीरें जिनमें महल एवं मंदिरों की तस्वीर दिखाई गई। जिससे स्वामी जी एवं उनको शिष्यों ने अलौकिक स्थल की संज्ञा दी। इस परिभ्रमण में नौतम स्वामी वडताल के साथ साथ उनके अनुयायी,जगन्नाथ स्वामी वडताल, परेश भगतजी वडताल,राजनगर,एस.एस.बी. कमांडेंट अमित कुशवाहा,कुमार शुभेश्वर सिंह के मित्र एस आर सिंह,घनश्याम ठाकुर,सदस्य,बिहार विधान परिषद,अमित कुमार,धनंजय कुमार,निखिल खेड़िया,रमेश झा,आशीष झा, डा.इन्द्र मोहन झा आदि इस यात्रा के दौरान रहे।



