
हर वक्त ईयर फोन बना शगल मौत का रूप
हेडफोन लगाकर सड़कों पर घूमना, रेलवे ट्रैक पार करना, दोपहिया, चार पहिया वाहन हो, यहां तक की साइकिल या रिक्शा चलाना फैशन बन गया है। दस में से पांच व्यक्ति वाहन चलाते समय मोबाइल पर बात करते हैं या गाने सुनते हैं, ऐसे लोग हादसे का शिकार हो जाते हैं। ऐसे हालात में लोगों को खुद ही जागरूक होना होगा और पुलिस को भी खुद की भूमिका से न्याय करना होगा।
जानकार बताते हैं कि वाहन पर बैठते ही चालकों की मानसिकता में अचानक परिवर्तन हो जाता है, अधिकांश युवा चालक रफ्तार से बाइक चलाते हैं। वह ना सिर्फ मोबाइल पर बात करते हैं बल्कि ईयर फोन लगाकर गाने भी सुनते हैं, जबकि बंद कार में तेज आवाज में गाने सुनने का प्रचलन भी बड़ा है। इतना ही नहीं सड़क पर पैदल चलते वक्त भी कुछ राहगीर ईयर फोन लगाए रहते हैं। यह फोन मोबाइल अथवा कार में तेज आवाज में गाने सुनने के दौरान चालक आसपास की परिस्थितियों का आकलन नहीं कर पाता, इसे सड़क हादसे हो जाते हैं।
नियमों की अनदेखी युवा अपनी जान हथेली पर लेकर सड़क पर उतर रहे हैं या खतरनाक प्रवृत्ति है। इससे बचना होगा दो पहिया, चार पहिया वाहन के अलावा पैदल यात्रा करने के दौरान यह फोन, मोबाइल अथवा तेज आवाज में गाने सुनने से बचना होगा, तभी हादसे टाले जा सकते हैं, स्कूल में बच्चों को यातायात नियमों की जानकारी सतत दी जाती है।
जानलेवा है आदत सड़क पर यातायात नियमों का अनुपालन जरूरी है। इसकी अनदेखी खुद की जान के लिए घातक है, इसे सभी को समझना होगा। छात्रों को जागरूक किए जाने की जरूरत है, यातायात नियमों के अनुपालन के लिए छात्रों को जागरूक किया जाता है उन्हें सड़क पर चलने के तौर तरीके बताएं जाते हैं।
यात्रा के दौरान मोबाइल फोन अथवा यह फोन का इस्तेमाल बेहद घातक है। ट्रैफिक पुलिस की मदद से छात्रों को जागरूक किया जाता है। परिजनों को भी यातायात नियमों का पालन कराने के लिए प्रेरित किया जाता है। इसमें कोई दो राय नहीं कि यह फोन का इस्तेमाल करने की प्रवृत्ति युवाओं में बड़ी है यात्रा के दौरान यह खतरनाक है।



