
मधुबनी-06 नवंबर। सिस्टम से टकराना एसएसबी जवान को महंगा पड़ा है। एसएसबी 51 वीं बटालियन सीतामढ़ी में तैनात हेड कांस्टेबल जवान के गायब होने के लगभग 55 दिनों बाद शनिवार की सुबह देवधा थाना क्षेत्र के अकौन्हा गांव स्थित कमला नदी के पश्चिमी तटबंध किनारे बेहोशी की हालत में हाथ पांव में रस्सी से बांध कर मुंह में टेप लगा लावारिस हालत देखा गया। स्थानीय लोगों के द्वारा घटना की जानकारी देवधा थाना पुलिस को दी गई। थाना के एसआई छटी लाल सिंह पुलिस बल के साथ घटनास्थल पर पहुंचकर बेहोशी की हालत में उक्त जवान को ईलाज के लिए जयनगर अनुमंडल अस्पताल में भर्ती कराया गया। ईलाज के बाद एसएसबी जवान खतरे से बाहर बताए गए हैं। ईलाजरत एसएसबी जवान की पहचान बेगूसराय जिले के नावकोठी थाना क्षेत्र निवासी लगभग 35 वर्षीय ज्ञान रंजन पिता तेज नारायण पाठक के रूप में की गई है।
एसएसबी जवान हेड कांस्टेबल ज्ञान रंजन ने बताया कि मैं एसएसबी 51 वीं बटालियन सीतामढ़ी में पदस्थापित था। मेरे ही डिपार्टमेंट के कुछ आला अधिकारी के द्वारा मुझे ड्यूटी के बजाए अन्य कार्य लिया जा रहा था। एक तरीके से मुझे मानसिक प्रताड़ना किया जा रहा है। इन बातों में मेरे परिवार के लोगों के द्वारा मुझे तनाव में देखकर बटालियन से एक महिने का छूटटी लेकर अपने घर आ गया। छूटटी अवधि समाप्त होने के बाद पीड़ित जवान ज्ञान रंजन पुनः बटालियन मुख्यालय में ड्यूटी ज्वाईन किया। परंतू डिपार्टमेंट के आला अधिकारियों के आदेश पर कठपुतली की तरह नाचना पड़ा। परंतू ड्यूटी अवधि में चिकित्सक से ईलाज चल रहा था। विभागीय चिकित्सक के बुलाने पर ईलाज होता था। उन्होंने बताया कि इन सभी बातों की जानकारी मैं अपनी पत्नी प्रीया कुमारी को दिया। मेरी पत्नी ने अधिकारियों के द्वारा जवानों का शोषण को लेकर इसी वर्ष पटना हाईकोर्ट में एक जनहित याचिका दायर की। कोर्ट ने मामले को संज्ञान में लेते हुए फैसला पीड़ित जवान की पत्नी के पक्ष में दिया। तथा अग्रिम कार्रवाई के लिए अनुसंसा किया। इसी मामले को लेकर एसएसबी सितामढ़ी बटालियन मुख्यालय के कुछ अधिकारियों के लिए पीड़ित जवान गले का हड्डी बन गया। पीड़ित जवान ने बताया कि मैं अनफिट होने के बाद भी मेरे वरीय अधिकारियों एवं विभागीय चिकित्सक के द्वारा मुझे 42 दिनों की सजा दी गई। तथा सजा पूरी होने के बाद मुझे आईजी से मिलने के लिए एक इंस्पेक्टर के द्वारा आदेश दिया गया।

आईजी से मिलने के लिए दो नबर के गेट से बाहर जाकर एक चार चक्का वाहन में बैठने के लिए कहां गया। उक्त चार चक्का वाहन में पहले से कुछ लोग मौजूद थे। नशे का इंजेक्शन लगाकर एक कमरे में कैद कर दिया गया। एक व्यक्ति अपना मुंह ढ़ककर मुझे खाना लाकर देता था। बेहोशी की हालत में बरामद होने पर जवान ने कौन लाया,कैसे लाया इन बातों की जानकारी नहीं है। पीड़ित जवान के पिता तेज नारायण पाठक ने बताया कि विभागीय सजा पूरी होने के दो तीन दिनों बाद मेरे पुत्र को गायब किया गया था, तब से वे लापता था। 13 सितंबर को गुम होने पर एसएसबी 51 वीं बटालियन सीतामढ़ी द्वारा सीतामढ़ी जिले के मेहसौल थाने में एक मामला दर्ज किया।
जबकि बटालियन मुख्यालय से 14 सितंबर की सुबह एसएसबी जवान ज्ञान रंजन के पिता तेज नारायण पाठक के मोबाइल पर गुम होने की सूचना दी गई। तेज नारायण पाठक ने उसी दिन मेहसौल थाने में अपने पुत्र के अपहरण के लिए आवेदन दिया। परंतू थाना द्वारा उक्त आवेदन पर सनहा दर्ज किया गया है। आवेदन में लिखा गया है कि एसएसबी के वरीय अधिकारियों के द्वारा जवानों के उपर किए जा रहे शोषण की एक विडियो सोशल मीडिया पर वायरल एवं हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर के कारण अधिकारियों के लिए चायलेंज था। जिसको लेकर अधिकारियों ने मेरे पुत्र को जिम्मेदार ठहरा रहे हैं। बहरहाल कानून अपना काम सही से करती हैं, तो सच्चाई सामने आ सकती है। आखिरकार 55 दिनों तक एसएसबी जवान को अपहरण कर कैद कर रखना कहीं साधारण मृत्यु तो घोषित करना तो नहीं था। स्थानीय लोगों की मानें,तो शनिवार की सुबह मोर्निंग वाॅक करने गए लोगों ने घटनास्थल पर एक ट्रक को काफी देर तक लगा हुआ देखा गया। जबकि कुछ ही देर बाद वहां पर एसएसबी जवान बेहोशी की हालत में पाया गया।
इधर ईलाजरत जवान से मिलने एसएसबी 48 वीं बटालियन जयनगर के डिप्टी कमांडेंट चंद्र शेखर जवानों के साथ अस्पताल पहुंचकर हालात का जायजा लिया।



