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लोकसभा ने की मणिपुर में शांति की अपील, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा- विपक्ष कर रहा राजनीति

नई दिल्ली-09 अगस्त। केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने लोकसभा को आज मणिपुर नस्लीय हिंसा के कारणों, इतिहास और सरकार द्वारा इसे रोकने के लिए किए गए प्रयासों की विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने इस दौरान राज्य में शांति बनाए रखने की अपील की। इसके अलावा लोकसभा में मणिपुर में शांति बनाए रखने और सभी पक्षों से सहयोग की अपील करते हुए एक प्रस्ताव पारित किया गया। केंद्रीय गृह मंत्री द्वारा पेश प्रस्ताव का सदन ने एकमत से समर्थन किया।

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने आज लोकसभा में अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा के दौरान आरोप लगाया कि विपक्ष परिस्थितिजन्य नस्लीय हिंसा के मामले में राजनीति कर रहा है। उन्होंने कहा कि मणिपुर में हिंसा के तांडव को कोई सही नहीं ठहरा सकता। वहां हुई घटनाएं शर्मनाक हैं परन्तु उस पर राजनीति करना उससे भी ज्यादा शर्मनाक है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री अपना पक्ष रखते लेकिन विपक्ष ने तो गृह मंत्री को भी लोकसभा में अपनी बात नहीं रखने दी।

मणिपुर से जुड़ी नस्लीय हिंसा के इतिहास का जिक्र करते हुए उन्होंने बताया कि 3 मई से पहले साढ़े छह साल भाजपा की सरकार के दौरान वहां एक भी दिन कर्फ्यू, बंद और ब्लॉकेड नहीं लगा। उन्होंने कहा कि इससे पहले भी मणिपुर और पूर्वोत्तर में नस्लीय हिंसा हुई हैं। इसके बावजूद आज तक किसी प्रधानमंत्री ने सदन में जवाब नहीं दिया। उन्होंने कहा कि कई बार तो सदन में नस्लीय हिंसा का मुद्दा भी उठने ही नहीं दिया गया।

गृहमंत्री अमित शाह ने मणिपुर हिंसा के कारणों से सदन को अवगत कराते हुए कहा कि म्यांमार में सैन्य शासन से कुकी जनजाति के लोग बड़ी संख्या में शरणार्थी बनकर भारत आ रहे हैं। सरकार ने वहां पहले ही सीमा पर बाड़ लगाने का काम शुरू कर दिया है। साथ ही बायोमीट्रिक जानकारी इकट्ठा कर उन्हें आधार और वोटर आईडी की नेगेटिव लिस्ट में डाला जा रहा है। इसके बावजूद जनसांख्यिकी बदलाव की आशंका पैदा हो रही थी। 29 अप्रैल को एक अफवाह फैली की कुकी समुदाय के 58 बसावटों को गांव घोषित किया जा रहा है। इससे एक अशांति उत्पन्न होनी शुरू हो गई। इसके बाद कानूनी प्रक्रिया के बिना ही हाई कोर्ट का एक फैसला आ गया, जिसमें मैतई समुदाय को जनजातीय दर्जा देने की बात कही गई। इसके बाद दो समुदायों के बीच में हिंसा प्रारंभ हुई। उन्होंने कहा कि इसमें ड्रग्स की भी एक भूमिका रही है।

हिंसा को रोकने की दिशा में सरकार के प्रयासों का उल्लेख करते हुए केंद्रीय गृहमंत्री ने कहा कि तुरंत मामले में सुरक्षा सलाहकार नियुक्त किया गया। मुख्य सचिव और डीजीपी को बदला गया। मामले में 14,898 लोगों को गिरफ्तार किया गया है और 606 एफआईआर दर्ज की गई हैं।

विपक्ष की मुख्यमंत्री को हटाए जाने और राज्य में राष्ट्रपति शासन लगाए जाने की मांग का जवाब देते हुए केंद्रीय गृहमंत्री ने कहा कि ऐसा सहयोग न मिलने की स्थिति में किया जाता है। उन्होंने कहा कि राज्य के मुख्यमंत्री केंद्र का पूर्ण सहयोग कर रहे हैं और हमारी सलाह पर उन्होंने मुख्य सचिव और डीजीपी को हटाया है।

गृहमंत्री ने मणिपुर हिंसा के दौरान हुई शर्मनाक घटना पर भी सदन को जानकारी देते हुए कहा कि इस पर भी तुरंत कार्रवाई की गई और नौ लोगों को जेल में डाला गया है। उन्होंने इस बात का सवाल उठाया की 4 मई की घटना पर आखिर संसद सत्र की शुरुआत के एक दिन पहले ही वीडियो वायरल क्यों हुआ। उन्होंने कहा कि होना यह चाहिए था कि जिसके पास भी वीडियो है वह तुरंत इसे डीजीपी और सरकार को दे ताकि कार्रवाई की जा सके।

उन्होंने कहा कि मणिपुर में हिंसा धीरे-धीरे कम हो रही है। सामान्य स्थिति बहाली की दिशा में प्रयास किया जा रहे हैं। 98 प्रतिशत स्कूलों में पढ़ाई हो रही है। लगातार केंद्र की ओर से सुरक्षा स्थिति की समीक्षा की जा रही है। दोनों समुदायों के बीच समस्या के समाधान के प्रयास किया जा रहे हैं। पहाड़ में रहने वाले कुकी लोगों और तराई में रहने वाले मैतई समुदाय के बीच 36 हजार अर्धसैनिक बलों का बफर जोन बनाया गया है।

केंद्रीय गृहमंत्री ने विपक्ष पर राजनीति करने का आरोप लगाते हुए कहा कि उनकी पार्टी भी विपक्ष में रही है और कभी भी हिंसा और दंगों के मसलों पर सदन को बाधित नहीं किया गया। उन्होंने विपक्ष से साथ मिलकर शांति प्रस्ताव का समर्थन देने के लिए एक प्रस्ताव भी पेश किया। हालांकि कांग्रेस नेता अधीर रंजन चौधरी ने कहा कि कल प्रधानमंत्री की उपस्थिति में शांति अपील का प्रस्ताव लाया जाना चाहिए।

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