
लोकसभा उपाध्यक्ष पद के चुनाव को लेकर याचिका पर जल्द सुनवाई से हाई कोर्ट का इनकार
नई दिल्ली- 2 दिसंबर। दिल्ली हाई कोर्ट ने लोकसभा के उपाध्यक्ष पद का चुनाव नहीं कराने के खिलाफ दायर याचिका पर जल्द सुनवाई करने से इनकार कर दिया है। चीफ जस्टिस डीएन पटेल की अध्यक्षता वाली बेंच ने याचिकाकर्ता से कहा कि सुनवाई के लिए जल्दबाजी क्या है।
याचिकाकर्ता के वकील ने कहा कि इस मामले की सुनवाई 29 नवंबर को होनी थी लेकिन बेंच सुनवाई के लिए नहीं बैठी और अगली सुनवाई की तिथि 28 फरवरी 2022 के लिए नियत कर दी गई। उन्होंने इस याचिका पर जल्द सुनवाई की मांग की। 30 सितंबर को कोर्ट ने लोकसभा सचिवालय को अपना पक्ष रखने के लिए समय दे दिया था। सुनवाई के दौरान लोकसभा सचिवालय की ओर से वरिष्ठ वकील राजशेखर राव ने कहा था कि ये पहली बार नहीं है जब लोकसभा के उपाध्यक्ष का पद खाली है। राव ने हाई कोर्ट से इस मामले पर कानूनी पक्ष रखने के लिए समय देने की मांग की थी। एक सितंबर को कोर्ट ने लोकसभा सचिवालय और केंद्र सरकार को अपना पक्ष रखने का निर्देश दिया था। कोर्ट ने केंद्र सरकार की ओर से पेश एएसजी चेतन शर्मा से कहा था कि हम नोटिस जारी नहीं कर रहे हैं, आप निर्देश लें।
याचिका पवन रिले ने दायर किया है। याचिका में कहा गया है कि लोकसभा के उपाध्यक्ष का पद दो साल से अधिक समय से खाली रखकर संविधान के अनुच्छेद 93 का उल्लंघन किया गया है। याचिका में कहा गया है कि 830 दिन बीत गए हैं लेकिन उपाध्यक्ष नहीं चुना गया है। यह बहुत गंभीर मामला है। याचिका में कहा गया है कि लोकसभा में प्रक्रिया और उसके कार्य संचालन के नियम 8 के तहत डिप्टी स्पीकर के चुनाव की तारीख तय करना लोकसभा के स्पीकर का प्राथमिक कर्तव्य है।
याचिका में कहा गया है कि धारा 93 के तहत डिप्टी स्पीकर का चुनाव जितनी जल्दी हो कराने की बात कही गई है। इसका मतलब ये नहीं है कि डिप्टी स्पीकर का चुनाव दो साल या उससे अधिक की अवधि तक बढ़ाई जा सकती है। डिप्टी स्पीकर के संवैधानिक पद के चुनाव में और देरी नियमों का उल्लंघन होगा।



