
प्रतिस्पर्धा (संशोधन) विधेयक-2023 को संसद की मंजूरी
नई दिल्ली- 03 अप्रैल। प्रतिस्पर्धा (संशोधन) विधेयक- 2023को उच्च सदन राज्यसभा ने सोमवार को ध्वनिमत से पारित कर दिया। इसी के साथ इस विधेयक को संसद की मंजूरी मिल गई। लोकसभा इसे पहले ही पारित कर चुकी है। इस बीच लोकसभा और राज्यसभा की कार्यवाही सोमवार को भी विपक्ष की अडानी-हिंडनबर्ग मामले की जांच संयुक्त संसदीय दल (जेपीसी) से कराने मांग के चलते बाधित रही। दोनों सदन पहले दोपहर दो बजे और बाद में बुधवार तक के लिए स्थगित कर दिए गए।
लोकसभा में चेयर की ओर से एक बार फिर विपक्ष से संसद की कार्यवाही चलने देने का अनुरोध किया गया। पीठासीन अधिकारी राजेन्द्र अग्रवाल ने विपक्ष से आग्रह किया कि निरंतर बाधा डालना उचित नहीं है। सत्र समाप्ति की ओर है।
राज्यसभा में सभापति जगदीप धनखड़ ने इस बात का उल्लेख किया कि 1952 में आज ही के दिन उच्च सदन का गठन हुआ था। यह देश के लोकतांत्रिक और संघीय ढांचे में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। राष्ट्र अपेक्षा करता है कि सदन उच्च मानकों का प्रदर्शन करे। यह मंच चर्चा और संवाद के लिए है। उन्होंने सदस्यों से अपील की कि चर्चा से आपसी मसलों को सुलझाया जाए। वे चर्चा में भाग लें और विकास में भागीदार बने।
इसके बावजूद विपक्ष का हंगामा जारी रहा। इसी बीच प्रतिस्पर्धा (संशोधन) विधेयक पहले चर्चा के लिए सदन के समक्ष रखा गया और बाद में ध्वनिमत से बिना किसी चर्चा के पारित कर दिया गया। इसके बाद कार्यवाही बुधवार तक के लिए स्थगित कर दी गई।
प्रतिस्पर्धा (संशोधन) विधेयक-2023 भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग (सीसीआई) को विलय और अधिग्रहण के मामले में अधिकार देता है। नए अधिकार के तहत संस्थाओं को 2,000 करोड़ रुपये से अधिक कीमत के सौदे के मामले में सीसीआई की मंजूरी लेनी होगी। साथ ही भारत में कारोबार का संचालन होना चाहिए।



