
नीट पीजी की काउंसलिंग पर लगी अंतरिम रोक सुप्रीम कोर्ट ने बढ़ाई
नई दिल्ली- 25 नवंबर। केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में कहा है कि ईडब्ल्यूएस कैटेगरी के लिए मानदंड पर पुनर्विचार किया जा रहा है। इसके बाद जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाली बेंच ने नीट-पीजी की काउंसलिंग पर लगी अंतरिम रोक बढ़ा दी है।
सुनवाई के दौरान सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि केंद्र सरकार समीक्षा कर रही है कि ईडब्ल्यूएस के लिए आठ लाख रुपया सालाना आमदनी की सीमा रहेगी या नहीं। सुप्रीम कोर्ट ने ईडब्ल्यूएस कैटगरी पर पुनर्विचार करने के लिए चार हफ्ते का समय दिया। मामले की अगली सुनवाई 6 जनवरी 2022 को होगी।
छह अक्टूबर को कोर्ट ने नीट-पीजी की काउंसलिंग पर अंतरिम रोक लगा दी थी। 21 अक्टूबर को सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से पूछा था कि वो ईडब्ल्यूएस के आरक्षण की पात्रता निर्धारित करने के लिए आठ लाख रुपये की वार्षिक आय के मानदंड को अपनाने के लिए क्या कवायद की। कोर्ट ने केंद्र से पूछा था कि ओबीसी और ईडब्ल्यूएस श्रेणियों के लिए समान मानदंड कैसे अपनाया जा सकता है जब ईडब्ल्यूएस आरक्षण में कोई सामाजिक और शैक्षिक पिछड़ापन नहीं है।
कोर्ट ने केंद्र सरकार से पूछा था कि आपके पास कुछ जनसांख्यिकीय या सामाजिक-आर्थिक डाटा होना चाहिए। आप हवा में सिर्फ आठ लाख नहीं निकाल सकते हैं। आप आठ लाख रुपये की सीमा को लागू करके असमान को समान बना रहे हैं। कोर्ट ने कहा था कि ईडब्ल्यूएस मानदंड एक नीतिगत मामला है, इसलिए इसकी संवैधानिकता को निर्धारित करने के लिए अपनाए गए कारकों को जानना जरूरी है।
दरअसल नीट परीक्षाओं के अखिल भारतीय कोटे में इस वर्ष ईडब्ल्यूएस के लिए 10 फीसदी आरक्षण लागू करने को चुनौती देते हुए कई याचिकाएं दायर की गई हैं। याचिकाओं में इस वर्ष नीट में ईडब्ल्यूएस आरक्षण लागू नहीं करने का अंतरिम आदेश देने की भी मांग कई गई है।



