
कोरोना से मौत के मुआवजे को लेकर कम दावोंं पर SC ने जताई चिंता
नई दिल्ली- 29 नवम्बर। सुप्रीम कोर्ट ने इस बात पर चिंता व्यक्त की है कि कोरोना से मौत के मुआवजे के लिए राज्य सरकार के पास दावों की काफी कम संख्या आई है। जस्टिस एमआर शाह की अध्यक्षता वाली बेंच ने कहा कि अधिकतर लोगों को पता नहीं है कि कोरोना से मृत्यु का मुआवजा दिया जा रहा है या फिर इसके लिए आवेदन किस अधिकारी को देना है। मामले पर अगली सुनवाई छह दिसंबर को होगी।
सुनवाई के दौरान गुजरात सरकार की ओर से सॉलिसीटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि राज्य सरकार दो हफ्ते में पोर्टल बनाएगी, जहां लोग आवेदन दे सकेंगे। तब कोर्ट ने कहा कि हम राज्यों से कहेंगे कि वह यही मॉडल लागू करें। कोर्ट ने कहा कि केरल सरकार ने भी एक पोर्टल बनाया है। तब मेहता ने कहा कि लेकिन हम उस मॉडल को नहीं जानते हैं।
22 नवंबर को कोर्ट ने गुजरात में कोरोना से मौत का मुआवजा पाने में लोगों को समस्याएं होने पर राज्य सरकार को फटकार लगाई थी। सुप्रीम कोर्ट ने गुजरात सरकार के मुख्य सचिव पंकज कुमार को फटकार लगाते हुए कहा था कि आपके मुख्यमंत्री को कुछ नहीं पता। श्रीमान सचिव,आप किस लिए हैं।
सुप्रीम कोर्ट ने पूछा था कि क्या आप अंग्रेजी जानते हैं? हमारे आदेश को समझते हैं? कोर्ट ने कहा था कि जल्द मुआवजा दें, नहीं तो लीगल सर्विस अथॉरिटी को जिम्मेदारी सौंप देंगे। नौकरशाही की देर करने की नीयत है। कोर्ट ने राज्य सरकार को निर्देश दिया था कि सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता के साथ बैठ कर प्रक्रिया को सरल बनाए।
सुनवाई के दौरान जस्टिस एम आर शाह ने पूछा था कि दस हजार लोगों में से कितनों को अब तक मृत्यु प्रमाण पत्र मिला है। कम से कम दस हजार लोगों को तो मृत्यु प्रमाण पत्र मिल जाना चाहिए था। जिनकी कोरोना से मौत हुई उनकी जानकारी भी तो सरकार के पास होगी।



