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ओमिक्रोन के खतरे को देखते हुए तीन दिवसीय क्रिसमस मेला स्थगित,बिशप डॉ यूजीन ने कहा-प्रभु ईसा का जन्म सम्पूर्ण मानव जाति के लिए उम्मीद का संदेश

वाराणसी-22 दिसम्बर। भारत में ओमिक्रोन वायरस के बढ़ते मामलों को देख इस वर्ष सुरक्षा कारणों से महापर्व क्रिसमस पर छावनी क्षेत्र स्थित सेंट मेरिज महागिरजा परिसर में तीन दिवसीय मेला स्थगित कर दिया गया है। इसके स्थान पर परिसर में तीन दिन 25, 26, 27 दिसम्बर को सांस्कृतिक कार्यक्रम होगा। सांस्कृतिक कार्यक्रम 35 मिनट का होगा। इसमें प्रभु ईसा मसीह के जीवन पर आधारित झांकियां प्रस्तुत की जायेगी।

बुधवार को यह जानकारी महागिरजा परिसर में वाराणसी धर्मप्रांत के बिशप डॉ यूजीन जोसेफ ने पत्रकारों को दी। उन्होंने बताया कि क्रिसमस पर परम्परागत धार्मिक आयोजन 24 दिसम्बर की रात 10.30 बजे से शुरू होगा। धार्मिक आयोजन में विशेष पूजा-आराधना, प्रभु की स्तुति में कैरल गीत, मिस्सा बलिदान (पूजा-विधि), प्रभु का जन्मोत्सव होगा। उन्होंने बताया कि जन्मोत्सव इस बार आधी रात के कुछ पहले ही होगा। जन्मोत्सव के बाद प्रभु के बाल्यरूपी प्रतीक का दर्शन श्रद्धालुओं को कराने के बाद परिसर में बने अस्थाई चरनी में स्थापित किया जायेगा।

डॉ यूजीन ने क्रिसमस पर संदेश देते हुए कहा कि पूरे देश में आध्यात्मिक उन्नति हो, लोगों का आर्थिक विकास हो, देश में आध्यात्मिकता का भंडार बढ़े। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की सोच के अनुरूप सबका साथ सबका विकास हो। देश के हर वर्ग में लगातार संवाद बने यहीं कामना है। हमारे जीवन से हर प्रकार की हिंसा एवं शोषण मिटे, शासन-प्रशासन ज्ञान और बुद्धिमानी से देश और समाज का संचालन करें। हम सब मिलकर देश में आये कोरोना महामारी की चुनौतियों का सामना कोविड प्रोटोकाल का पालन कर करें। महामारी के सुरक्षा नियमों का पालन सबके लिए जरूरी है।

बिशप ने कहा कि प्रभु ईसा मसीह के जन्म का संदेश समस्त जगत के लिए शान्ति, क्षमा, करुणा का है। जहां बंधु स्नेह की सीमा शत्रु से प्रेम है। प्रभु ईसा का जन्म सम्पूर्ण मानव जाति के लिए उम्मीद का संदेश है। कोरोना काल के विषम हालात में भी उल्लासपूर्ण जीवन जीने का शक्ति प्रदान करता है। पूरा विश्व इस महामारी का बड़े साहस और धैर्य से मुकाबला कर रहा है, एक बेहतर उम्मीदों भरे कल के लिए। विशप ने डिजिटल दौर में युवा पीढ़ी के अधिक शामिल रहने, सामुदायिक जीवन से कटने पर चिंता भी जताई। उन्होंने कहा कि डिजिटल दौर आज समय की जरूरत है। पर इससे आवश्यकता के बाद अलग रहने की जरूरत है। लोगों को पहले की भांति सामुदायिक जीवन में अपनी भागीदारी बढ़ानी चाहिए।

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