
उरुका के अवसर पर डिमोरिया के तीन ऐतिहासिक झीलों में लोगों ने सामूहिक रूप से पकड़ी मछली
गुवाहाटी- 14 जनवरी। गुवाहाटी के बाहरी इलाका डिमोरिया के तीन ऐतिहासिक बिल (झील) में भोगाली बिहू के उरूका के दिन शनिवार की सुबह हजारों की संख्या में लोगों ने सामूहिक रूप से मछली पकड़ने पहुंचे।
कामरूप (मेट्रो) जिलांतर्गत गुवाहाटी के बाहरी इलाका सोनापुर के बोमानी खेत्री इलाके की जालीखारा और पारखाली में प्रतिवर्ष की तरह आज भी हजारों की संख्या में लोग माघ बिहू के उरूका के मौके पर सामूहिक रूप से मछली पकड़ने पहुंचे।
शनिवार को सामूहिक रूप से मछली पकड़ने के लिए सुबह से ही स्थानीय लोग विभिन्न प्रकार के मछली पकड़ने वाले जाल आदि लेकर तीनों झील के किनारे पहुंचे। स्थानीय राजा द्वारा पूजा-अर्चना करने के बाद सभी ने सामूहिक रूप से मछलियां पकड़ी।
वहीं लोग झील के किनारे लालीलांग नृत्य की धुन पर जमकर झूमते नजर आए। बामनी झील के किनारे तेनतेला राजा (तेतेलिया के राजा) पानबर रंग्पी ने सबसे पहले पूजा अर्चना किया। इसके बाद लोग सामूहिक रूप से हजारों लोग.मछली पकड़ने के लिए झील में उतरे।
वहीं जालीखरा और पारखाली झील में डिमोरिया के राजा हलिसिंह रहांग ने पूजा अर्चना किया। इसके बाद लोगों ने सामूहिक रूप मछली पकड़ने के लिए झील में उतरे। मछली पकड़ने की यह परंपरा काफी पुरानी है। लोगों का मानना है कि मछली पकड़ने से पहले जब राजा द्वारा पूजा अर्चना की जाती है तब किसी प्रकार की कोई अप्रिय घटना नहीं होती है।
हजारों की संख्या में लोग हर साल सामूहिक रूप से मछली पकड़ते हैं। लेकिन, आज तक किसी भी प्रकार का कोई नुकसान नहीं हुआ है। हर वर्ष पारखाली झील के पास डिमोरिया के राजा हलिसिंह रहांग अपने मंत्रिमंडल के साथ एक विशेष बैठक करते हैं। यह परंपरा राजा के शासन के कार्यकाल से चली आ रही है। स्थानीय लोगों ने कहा कि तीनों झीलों का अस्तित्व धीरे-धीरे खत्म होता जा रहा है अगर हालात ऐसा रहा तो आने वाले समय में तीनों झील का सिर्फ नाम ही बचेगा। स्थानीय लोगों ने समय रहते राज्य सरकार से इन तीनों झीलों को बचाने का आह्वान किया है। वहीं इस बार अन्य वर्ष की तुलना में लोगों को तीनों जिलों में काफी कम मछलियां मिली हैं।



