ताज़ा ख़बरें

आर्थिक संकट से जूझ रहे श्रीलंका ने विदेशी कर्ज चुकाने से खड़े किए हाथ

कोलंबो- 13 अप्रैल। भीषण आर्थिक संकट के दौर से गुजर रहे श्रीलंका ने 51 अरब डालर के विदेशी कर्ज चुकाने को लेकर फिलहाल हाथ खड़े कर दिए हैं। वित्त मंत्रालय ने बयान जारी कर बताया कि सरकार ने एलान किया है कि अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आइएमएफ) से बेलआउट के तहत मिले 51 अरब डालर के कर्ज का वह फिलहाल भुगतान करने में असमर्थ है।

वित्त मंत्रालय ने घोषणा की है कि द्विपीय राष्ट्र को कर्ज देने वाली संस्थाएं व विदेशी सरकारें मंगलवार दोपहर से लंबित ब्याज को पूंजी में तब्दील कर सकती हैं अथवा श्रीलंकाई रुपये के रूप में भुगतान वापसी का विकल्प चुन सकती हैं। यह नीति सेंट्रल बैंक आफ श्रीलंका व दूसरे देशों के सेंट्रल बैंक के बीच आदान-प्रदान को छोड़कर सभी अंतरराष्ट्रीय बांड, द्विपक्षीय कर्ज तथा संस्थानों व वाणिज्यिक बैंकों से लिए गए ऋण पर लागू होगी।

श्रीलंका सरकार ने जनवरी में आयात भुगतान के लिए कर्ज अदायगी रोकने की अपील का विरोध किया था। एक विश्लेषक ने कहा कि यह एकतरफा ऋण स्थगन है। इसके लिए कर्जदाता से बात नहीं की गई। सेंट्रल बैंक के पूर्व डिप्टी गवर्नर डब्ल्यूए विजयवर्धना ने कहा कि विदेशी मुद्रा भंडार खाली होने के कारण सरकार के पास कोई विकल्प नहीं बचा था। इस बीच, श्रीलंका ने पाकिस्तान की तरफ से गत वर्ष प्रस्तावित आर्थिक मदद को निर्गत करने में तेजी लाने की अपील की है। इनमें खेल गतिविधियों के लिए 5.2 करोड़ पाकिस्तानी रुपये, रक्षा उपकरणों की खरीद के लिए एक करोड़ डालर का कर्ज,पांच करोड़ डालर की एक अन्य रक्षा कर्ज सुविधा तथा आपसी सहमति की सामग्री की खरीद के लिए 20 करोड़ डालर का कर्ज शामिल है।

भुगतान का समय व कर्ज की राशि 2.5 अरब डालर से बढ़ाने की श्रीलंका की मांग पर चुप्पी साधने वाले चीन ने कहा है कि वह द्वीपीय राष्ट्र की मदद का हरसंभव प्रयास कर रहा है। चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने झाओ लिजियान ने कहा कि दोनों देशों के बीच राजनयिक संबंध स्थापित होने के बाद से हम एक-दूसरे की मदद कर रहे हैं। देशव्यापी विरोध प्रदर्शनों के बीच दो असंतुष्ट सांसदों की गोटाबाया सरकार में वापसी ने राजपक्षे परिवार को बड़ी राहत दी है। इनमें पूर्व राष्ट्रपति मैत्रिपाल सिरिसेन की श्रीलंका फ्रीडम पार्टी (एसएलएफपी) के शांता बंडारा शामिल हैं, जिन्होंने कुछ दिनों पहले सरकार पर कुप्रबंधन का आरोप लगाते हुए इस्तीफा दे दिया था।

उधर, एसएलएफपी उपाध्यक्ष रोहन प्रियदासा ने बंडारा के खिलाफ कार्रवाई की चेतावनी दी है। उल्लेखनीय है कि पिछले हफ्ते प्रधानमंत्री महिंदा राजपक्षे को छोड़कर श्रीलंका की पूरी कैबिनेट ने इस्तीफा दे दिया था। इसके बाद सत्तारूढ़ गठबंधन के 42 सासंदों ने सरकार का साथ छोड़ दिया था।

दवा समेत दूसरी वस्तुओं की किल्लत

श्रीलंका में दवा समेत दूसरी वस्तुओं की किल्लत ने लोगों की परेशानी बढ़ा दी है। चिकित्सकों के संगठन ने सरकार से अस्पतालों में जीवन रक्षक दवाओं की उपलब्धता अविलंब सुनिश्चित कराने की अपील की है।

भारत ने श्रीलंका को दी 11,000 टन चावल की सौगात

भारत ने श्रीलंकावासियों को सिंहल व तमिल नववर्ष से पहले बड़ी सौगात दी है। भारत से भेजी गई 11,000 टन चावल की खेप मंगलवार को कोलंबो पहुंच गई है। श्रीलंका में सिंहल व तमिल नववर्ष 13 व 14 अप्रैल को मनाया जाएगा। भारतीय उच्चायोग की तरफ से जारी बयान के अनुसार, पिछले एक हफ्ते में श्रीलंका को 16,000 टन चावल की आपूर्ति की गई है। इन दिनों श्रीलंका में खाने-पीने की चीजों के दाम सातवें आसमान पर हैं। पेट्रोल व बिजली संकट ने भी लोगों को परेशान कर दिया है।

Join WhatsApp Channel Join Now
Subscribe and Follow on YouTube Subscribe
Follow on Facebook Follow
Follow on Instagram Follow
Follow on X-twitter Follow
Follow on Pinterest Follow
Download from Google Play Store Download

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button