
MADHUBANI: मंच की एकता और सामूहिक सहयोग सर्वोपरि, योजनाबद्ध रणनीति बनाने की जरूरत : ऋतिक मिश्रा
मधुबनी- 24 फरवरी। सामाजिक समन्वय मंच की बैठक सह चिंतन शिविर का आयोजन किया गया। जिसमें समाज,संगठन और राष्ट्रहित से जुड़े महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा की गई। बैठक को संबोधित करते हुए सामाजिक समन्वय मंच के संयोजक एवं संस्थापक ऋतिक मिश्रा ने मंच के प्रशासनिक सुधार, पदों के सुव्यवस्थित आवंटन तथा प्रत्येक सदस्य को जिम्मेदारी सौंपने की आवश्यकता पर बल दिया।
किरण कुमारी ने महिलाओं को समाज की मुख्यधारा में सशक्त रूप से जोड़ने की आवश्यकता पर विशेष जोर देते हुए कहा कि महिलाओं की सर्वांगीण विकास के लिए वित्तीय सहायता, अनुदान एवं आर्थिक प्रोत्साहन योजनाओं को और अधिक प्रभावी बनाया जाना चाहिए। डॉ. शोएब राघव ने मंच के विस्तार और उसके व्यापक प्रभाव पर चर्चा करते हुए कहा कि मंच के उद्देश्य से अधिक से अधिक लोगों को अवगत कराने के लिए योजनाबद्ध रणनीति बनाने की जरूरत है। गिरिजानंद ने सामाजिक समन्वय मंच’ की मजबूती और विस्तार के लिए निष्ठा के साथ कार्य करने का संकल्प दोहराते हुए कहा कि मंच द्वारा दी गई जिम्मेदारी पूरी ईमानदारी और समर्पण के साथ पूरा करेंगे।
डॉ. शैलेन्द्र ने कहा कि शिक्षा ही समाज परिवर्तन का मूल आधार है। मंच के माध्यम से वंचित एवं पिछड़े वर्ग तक गुणवत्तापूर्ण शिक्षा पहुंचाने का बीड़ा उठाना चाहिए। मेहताब राजा ने कहा कि देश की संस्कृति पर गर्व है। सबसे बड़ी पहचान हमारी इंसानियत है। जाति-धर्म, ऊंच-नीच और भेदभाव से उपर उठकर मानवता की रक्षा के लिए आगे आना होगा। हमें दूसरे के दुख-दर्द को समझकर, प्रेम और भाईचारा के साथ व्यवहार करना चाहिए। इंसानियत को अपनी पहचान बनाने से दुनिया में शांति, भाईचारा और प्रेम स्वतः ही बढ़ेगा। ऋषि कुमार ने कहा कि मंच की उन्नति से ही सामाजिक समरसता बहाल होगा। अनुशासन के साथ मंच के निर्णयों को धरातल पर उतारने के लिए तत्पर रहने की जरूरत है।
अनिकेत मिश्रा ने कहा कि समाज के उत्थान के लिए शिक्षा, समानता और संवेदनशीलता सबसे महत्वपूर्ण स्तंभ हैं। दूसरों की मदद के लिए हाथ बढ़ाने से सशक्त और समावेशी राष्ट्र का निर्माण होगा। सचिन राम ने संगठन में अनुशासन की अनिवार्यता पर बल देते हुए कहा कि किसी भी संस्था की सफलता उसके अनुशासन, समर्पण और कार्यप्रणाली पर निर्भर होता है। मुकेश जी ने मंच की एकता और सामूहिक सहयोग को सर्वोपरि बताते हुए कहा कि आपसी समन्वय और पारस्परिक विश्वास से मंच को मजबूत बनता है। शिवसागर जी ने कहा कि नैतिकता, न्याय और समता आधारित समाज निर्माण पर जोर दिया जाना चाहिए।



