भारत

गुजरात विधानसभा में समान नागरिक संहिता विधेयक पारित, गुजरात बना देश का दूसरा राज्य 

गांधीनगर- 25 मार्च। गुजरात विधानसभा में समान नागरिक संहिता (यूसीसी) विधेयक आज बहुमत से पारित हो गया है। इसके साथ ही उत्तराखंड के बाद गुजरात यूसीसी लागू करने वाला देश का दूसरा राज्य बन गया है। बिल पारित हाेने के बाद सदन में सत्तापक्ष के सदस्याें ने समर्थन जताते हुए “जय श्री राम” के नारे लगाए और मेज थपथपाकर स्वागत किया। सदन में बिल के विराेध में विपक्षी सदस्याें ने सवाल उठाएं। वहीं सत्तापक्ष के सदस्याें ने इस बिल काे समानता, न्याय और राष्ट्रीय एकता को मजबूत करने वाला बताया।

गुरुवार काे विधानसभा में राज्य के मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने समान नागरिक संहिता विधेयक पेश किया। जिसके बाद सदन में 7 घंटे में लंबी चर्चा हुई। चर्चा के दौरान हलाला प्रथा, शाह बानो केस, अभिनेता धर्मेंद्र के दूसरे विवाह और श्रद्धा वाकर जैसे मामलों का भी उल्लेख किया गया। मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने विधेयक पेश करते हुए कहा कि यह कानून समानता, न्याय और राष्ट्रीय एकता को मजबूत करेगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि माइनॉरिटी कम्युनिटी में पुरखों से शादी एक परंपरा है, लेकिन इस बिल का कानून माइनॉरिटी कम्युनिटी पर लागू नहीं होगा। हम बराबरी, न्याय और एकता के राष्ट्रीय संकल्प को मज़बूत करेंगे। हमारे देश की संस्कृति हमें परिवार की भावना सिखाती है। उन्हाेंने कहा कि सरकार इस बात के लिए सतर्क है कि जातिगत भेदभाव न हो। शादी का ज़रूरी रजिस्ट्रेशन, तलाक़ के एक जैसे नियम, पेनल्टी समेत कुछ ज़रूरी प्राॅविज़न होंगे। शादी का रजिस्ट्रेशन न कराने वालों को सज़ा देने का प्राॅविज़न है।

उन्हाेंने कहा कि राज्य के सभी नागरिकों के लिए एक जैसा कानून होगा। जो लोग अपनी शादी रजिस्टर नहीं करवाएंगे, उन पर दस हजार रुपये का जुर्माना लगेगा और एक से ज़्यादा बार शादी करने वालों को चार साल की जेल होगी। कोर्ट के बाहर तलाक अमान्य होगा और यह सज़ा के दायरे में आएगा। लिव-इन रिलेशनशिप के लिए 3 महीने के अंदर रजिस्ट्रेशन ज़रूरी है।

सदन में चर्चा के दौरान डिप्टी चीफ मिनिस्टर हर्ष संघवी ने एक गंभीर मुद्दा उठाया। संघवी ने कहा कि कुछ मामलों में लड़के गलत नाम रखकर लड़कियों को फंसाते हैं। नकली शादियां होती हैं और फिर जब उनकी असली पहचान सामने आती है, तो लड़कियां ऐसे अपराधों का शिकार हो जाती हैं। इसे रोकने के लिए सख्त पुलिस कार्रवाई ही एकमात्र उपाय है। कोर्ट के फैसले का ज़िक्र करके ‘हलाला’ प्रथा पर चर्चा करते हुए संघवी ने बताया कि तलाक के बाद अपने पति से दोबारा शादी करने के लिए एक महिला को दूसरे व्यक्ति से शादी करने की प्रक्रिया से गुज़रना पड़ता है। हालांकि, कांग्रेस सदस्य इमरान खेड़ावाला ने इस मुद्दे का विरोध किया और कहा कि हलाला को लेकर गलत मैसेज फैलाए जा रहे हैं। यह दावा कि इस प्रथा में शारीरिक संबंध ज़रूरी हैं, सही नहीं है।

सदन में चर्चा के दौरान कांग्रेस विधायक शैलेश परमार ने सरकार और सत्ताधारी पार्टी की कड़ी आलोचना की। उन्होंने कहा कि जब बजट की मांग जैसे जनहित के मुद्दों पर चर्चा हो रही थी, तो सदस्य सदन में मौजूद नहीं थे। आज यूसीसी का मुद्दा सदन में दोगुनी ताकत से देखा जा रहा है। इस स्थिति से ऐसा लगता है कि चुनाव पास आने के साथ राजनीतिक दिलचस्पी बढ़ गई है। परमार ने कहा कि सरकार को कानून बनाने का अधिकार है, लेकिन उसे कानून लागू करने और उसके असर का अधिकार भी है। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या गुजरात सरकार का यूसीसी कानून राज्य के नागरिकों तक ही सीमित रहेगा या नहीं? क्या इसका असर दूसरे लोगों पर भी पड़ेगा? इस बयान के साथ उन्होंने सरकार की पॉलिसी और उसके असर पर गंभीर सवाल उठाए।

इससे पहले, सदन की कार्यवाही प्रश्नकाल से शुरू हुई। प्रश्नकाल के बाद कांग्रेस के अमित चावड़ा ने राज्य में पेट्रोल, डीजल और गैस की कमी का मुद्दा उठाया। इस पर सदन में भारी हंगामा हुआ और सदस्यों के बीच तीखी बहस हुई।

बिल के मुख्य प्रावधान इस प्रकार हैं:-

-सभी नागरिकों के लिए एक समान कानून लागू होगा

-विवाह का पंजीकरण अनिवार्य होगा

-पंजीकरण न कराने पर ₹10,000 तक का जुर्माना

-एक से अधिक विवाह पर 4 साल तक की सजा

-कोर्ट के बाहर तलाक अमान्य होगा

-लिव-इन रिलेशनशिप की 3 महीने के भीतर रजिस्ट्रेशन अनिवार्य

-धोखाधड़ी करने वालों पर सख्त कार्रवाई

न्याय की दिशा में बड़ा बदलाव: अमित शाह

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने गुजरात में यूसीसी बिल पारित हाेने काे ऐतिहासिक कदम बताया है। उन्होंने कहा कि यह निर्णय देश में समानता और न्याय की दिशा में बड़ा बदलाव लाएगा। शाह ने कहा कि अब देश तुष्टिकरण की राजनीति से नहीं, बल्कि सभी नागरिकों के लिए समान कानून के आधार पर चलेगा। उन्होंने जोर देकर कहा कि हर धर्म और वर्ग के लोगों के लिए एक समान कानून होना चाहिए। शाह ने गुजरात के मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल और सभी विधायकों को इस फैसले के लिए बधाई दी। उन्होंने इसे भाजपा के संकल्प और विचारधारा की जीत बताया।

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