भारत

वैश्विक नेता बनने के लिए राष्ट्र को औपनिवेशिक मानसिकता से मुक्ति पानी होगी: उपराष्ट्रपति

श्रीनगर- 26 फरवरी। उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने गुरुवार को कश्मीर विश्वविद्यालय के 21वें दीक्षांत समारोह को संबोधित करते हुए कहा कि नवाचारों के क्षेत्र में वैश्विक नेता बनने के लिए देश को अपनी औपनिवेशिक मानसिकता त्यागनी होगी। उपराष्ट्रपति ने युवाओं को सोशल मीडिया के उपयोग के प्रति सचेत रहने की भी सलाह दी। उन्होंने कहा कि इस पर नियंत्रण रखना होगा। सोशल मीडिया आपको जीवन में अधिक सफल होने में मदद नहीं करेगा। हर चीज की अपनी सीमा होनी चाहिए।

उन्होंने कहा कि एक स्नातक छात्र के रूप में मैं आप सभी से स्वदेशी नवाचार और भारतीय ज्ञान, संसाधनों और आवश्यकताओं पर आधारित समाधानों पर ध्यान केंद्रित करने का आग्रह करता हूं। हमें चिंतित होने की आवश्यकता नहीं है, हमें हीन होने की आवश्यकता नहीं है। हमें सबसे पहले अपनी औपनिवेशिक मानसिकता को त्यागना होगा। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश में उद्यमशीलता के माहौल को पहले से कहीं अधिक जीवंत और सहायक बनाया है।

कोविड-19 महामारी का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री ने देश के सभी वैज्ञानिकों से इस महामारी के लिए टीका विकसित करने का आह्वान किया है। हममें से कितने लोगों ने इस पर विश्वास किया था? लेकिन हमने सबसे बेहतरीन टीका खोज लिया है और यह पूरी मानवता के लिए बहुत कारगर साबित हुआ है। उपराष्ट्रपति ने आगे कहा कि इसी टीके पर सबसे विकसित पश्चिमी देशों ने भी शोध और विकास किया है, लेकिन वे सभी इसे पेटेंट कराने में पीछे रह गए, ताकि वे इसे ऊंची कीमत पर बेच सकें।

उन्होंने कहा कि एक टीका 7,500 अमेरिकी डॉलर में बिक सकता है, लेकिन एक गरीब आदमी इसे कैसे खरीद सकता है? उन्होंने कहा कि भारतीय नवाचारों को पश्चिमी दुनिया में भी व्यापक रूप से स्वीकार किया जाता है। उन्होंने कहा कि अब पूरी दुनिया आपके लिए खुली है, यह आपकी पहल है, आपकी रुचि है, आपका उत्साह है और आपकी मेहनत आपको दुनिया के शिखर पर पहुंचाएगी। राधाकृष्णन ने बताया कि हाल ही में केंद्र सरकार ने 1600 करोड़ रुपये से अधिक की अनुमानित लागत से श्रीनगर अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के विकास और विस्तार को मंजूरी दे दी है।

उन्होंने कहा कि हमारे मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने कहा था कि पर्यटन का विस्तार किया जाना है, लेकिन इसे हमारे महान राज्य के पारिस्थितिकी तंत्र को प्रभावित किए बिना किया जाना चाहिए। उन्होंने आगे कहा कि चिनाब नदी पर बना रेल पुल एक चमत्कार है जो सबसे ऊंचा रेलवे पुल है।उन्होंने कहा कि कई अन्य अवसंरचना परियोजनाएं हैं जो एक बड़ा संदेश देती हैं। ये परियोजनाएं इंजीनियरिंग उपलब्धियों से कहीं अधिक हैं। ये सामाजिक सद्भाव के साधन हैं। जब स्थान जुड़ते हैं तो लोग जुड़ते हैं। और जब लोग जुड़ते हैं तो दिल आपस में जुड़ते हैं। उपराष्ट्रपति ने कहा कि ये पहलें आज स्नातक हो रहे युवाओं जैसे युवाओं के लिए नए अवसर भी पैदा करती हैं।

उन्होंने कहा कि जम्मू और कश्मीर के छात्रों के लिए प्रधानमंत्री की विशेष छात्रवृत्ति योजना छात्रों को देश भर के संस्थानों में अध्ययन करने में सक्षम बनाकर एक महान अवसर, आकांक्षा और राष्ट्रीय एकता को बढ़ावा देती हैं। छात्रों से नशीले पदार्थों से दूर रहने का आग्रह करते हुए राधाकृष्णन ने कहा कि आपके माता-पिता आप पर निर्भर हैं कि आप उनके बुढ़ापे में उनकी देखभाल करेंगे। उन्होंने आगे कहा कि हर धर्म नशीले पदार्थों को सबसे पापपूर्ण पदार्थ मानता है, इसलिए नशीेले पदार्थों से दूर रहें।

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