
ज्योतिष का उद्देश्य भाग्य बताना ही नहीं, ‘कर्मयोगी’ बनाना भी होता: राज्य ज्योतिषी
मधुबनी- 07 अप्रैल। ज्योतिष का उद्देश्य केवल भाग्य बताना नहीं, बल्कि ‘कर्मयोगी’ बनाने पर जोर देना है। सही कर्म ही सुखद भविष्य बनाता है। ज्योतिष विद्या एक ‘प्रकाश-विज्ञान’ की तरह है। यह जीवन में अनिश्चितताओं को दूरकर व्यक्ति को मार्गदर्शन और बेहतर भविष्य का अवसर प्रदान करती है। उक्त बातें अयोध्या के राज्य ज्योतिषी डॉ. पं. अवधेश पांडेय ने कहीं।
मधुबनी शहर के रांटी स्थित पवन कुमार मिश्र के नेतृत्व में आयोजित सम्मान समारोह को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि ज्योतिष ग्रहों की स्थिति के अनुसार स्वास्थ्य और जीवनशैली में सुधार लाने का महत्वपूर्ण उपाय होता है। काशी की वास्तु विशेषज्ञ तान्याश्री ने कहा कि वास्तुदोष से तरह-तरह की समस्या उत्पन्न होती रहती है। बीमारियों और जीवन की बाधाओं को कम करने में वास्तु शास्त्र सहायता करता है। कामाख्या साधक ज्योतिषविद पं. मनोज तिवारी ने कहा कि ज्योतिष समय के चक्र को समझने में मदद करता है। व्यक्ति को ब्रह्मांडीय ऊर्जाओं से जोड़ता है। जीवन के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण विकसित करने में मदद करता है। हरिद्वार की ब्रह्मचारिणी कविता वशिष्ठ ने कहा कि ज्योतिष विद्या आकाश में स्थित ग्रहों,नक्षत्रों और खगोलीय पिंडों की स्थिति का अध्ययन कर मानव जीवन पर उनके प्रभावों का विश्लेषण और होने वाली समस्याओं का समाधान करने वाली प्राचीन विद्या है।
अंतरराष्ट्रीय ज्योतिष महासम्मेलन के आयोजन डॉ. सुनील श्रीवास्तव ने कहा कि मानव जीवन पर पडने वाले वर्तमान और भविष्य का पूर्वानुमान लगाने, आत्म-ज्ञान, करियर मार्गदर्शन, स्वास्थ्य सुधार, और चुनौतियों से निपटने के लिए कर्म-आधारित समाधान प्रदान करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। ज्योतिष जन्मकुंडली के माध्यम से लोगों की ताकत, कमजोरियों और जीवन के उद्देश्य को समझने में मदद करता है। ज्योतिष विद्या को करियर बनाकर लोगों का मार्गदर्शन प्रदान किया जा सकता है। समारोह में समाजसेवी पवन कुमार मिश्र ने अतिथियों को मिथिला की परंपरा के अनुसार पाग, दोपटा भेंटकर सम्मानित किया।



