भारत

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में सबसे बड़ी उपलब्धि नक्सल मुक्त भारत: शाह

नई दिल्ली- 30 मार्च। केन्द्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने सोमवार को लोकसभा में घोषणा की कि देश से नक्सलवाद समाप्त हो गया है। नक्सल आंदोलन के नेतृत्व में शामिल माओवादी मारे गए, गिरफ्तार किए गए या सरेंडर कर चुके हैं। ऐसा स्पष्ट नीति और दृढ़ राजनीतिक इच्छाशक्ति से संभव हो पाया है। उन्होंने इसके लिए सुरक्षा बलों के काम की सराहना की और इसे प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में हासिल की गई सबसे बड़ी उपलब्धि बताया। शाह ने कांग्रेस पर सशस्त्र विद्रोह को मूक समर्थन देने का आरोप लगाया और खुद को मानवतावादी कहने वाले शहरी नक्सलियों की आलोचना की।

लोकसभा में ‘नक्सलवाद के खिलाफ भारत की निर्णायक लड़ाई’ विषय पर चर्चा हुई। इसमें सदन के कई सदस्यों ने भाग लिया। चर्चा में विपक्षी सदस्यों की ओर से नक्सलवाद को विकास के अभाव से जोड़े जाने की शाह ने कड़ी निंदा की। शाह ने स्पष्ट किया कि नक्सलवाद विकास की मांग नहीं, बल्कि एक विचारधारा से प्रेरित हिंसक आंदोलन था। यह दुर्गम क्षेत्रों में शासन की पहुंच के अभाव के कारण देश के एक बड़े भू-भाग में यह आजादी के बाद फैला। नक्सलवाद का मूल कारण गरीबी नहीं बल्कि एक विचारधारा रही। नक्सलवाद के कारण ही इन क्षेत्रों में गरीबी बनी रही। सरकार का लक्ष्य 31 मार्च 2026 तक देश को नक्सलवाद से पूरी तरह मुक्त करना था। शाह ने कहा, “वे आज धड़ल्ले से कह सकते हैं कि देश नक्सलवाद से मुक्त हो गया है।”

माओवाद का समर्थन करने वाले बुद्धिजीवियों को ‘अर्बन नक्सल’ कहकर शाह ने संबोधित किया और कहा कि इंदिरा गांधी के नेतृत्व वाली कांग्रेस ने वामपंथी विचारधारा से जुड़े लोगों को स्वीकार किया। उन्होंने कहा कि अर्बन नक्सल मानवाधिकार की बात करते हैं, लेकिन निर्दोष नागरिकों और सुरक्षा बलों की हत्या पर चुप रहते हैं। उन्होंने कहा, “मैं जन्म से हिन्दू हैं और कर्म सिद्धांत पर विश्वास रखता हूं। मैं मानता हूं कि नक्सलवाद का मौखिक समर्थन करने वाले हथियार उठाने वालों जितने ही पापी हैं।”

कांग्रेस पर निशाना साधते हुए शाह ने कांग्रेस के शासन काल में सोनिया गांधी के नेतृत्व में बनी राष्ट्रीय सलाहकार परिषद में शामिल सदस्यों के नक्सलियों से संबंधित होने और राहुल गांधी के ऐसे लोगों के साथ मंच साझा करने के उदाहरण दिए। उन्होंने कहा, “आज कांग्रेस पार्टी के नेता नक्सलियों के साथ रहकर खुद नक्सली बन गए हैं।” उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ को छोड़कर बाकी राज्यों में नक्सलवाद 2024 तक ही लगभग समाप्त हो गया था लेकिन कांग्रेस की राज्य सरकार के कारण छत्तीसगढ़ में नक्सली बचे रहे।

शाह ने कहा कि नक्सलवाल के खिलाफ आंदोलन में सरकार ने पूरी संवेदनशीलता के साथ काम किया। इसके कारण ही 2024 से 26 के बीच केवल 706 नक्सली मारे गए, 2218 गिरफ्तार हुए और 4839 ने आत्मसमर्पण किया। संवाद, सुरक्षा और समन्वय के साथ काम करते हुए सरकार नक्सलियों के पुनर्वास के लिए योजनाएं लाई।

इस दौरान शाह ने नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में सरकार के प्रयासों से हुए विकास कार्यों का उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि इन क्षत्रों में 12 हजार किमी सड़क का निर्माण किया गया, 5 हजार मोबाइल टावर लगाए गए, 1804 बैंक शाखाएं स्थापित की गई, 6025 डाकघर बनाए गए। करोड़ों रुपये विकास कार्यों के लिए दिए और बहुत सी योजनायें लागू की गई।

शाह ने विपक्ष की ओर से उपराष्ट्रपति पद के उम्मीदवार बनाए गए सुदर्शन रेड्डी के सलवा जुडूम को समाप्त किए जाने के फैसले की सदन में घोर निंदा की। उन्होंने कहा कि संवैधानिक पदों पर बैठे व्यक्ति को अपनी राजनीतिक विचारधारा के आधार पर निर्णय देने का कोई अधिकार नहीं है। इस निर्णय के चलते नक्सलियों के खिलाफ शुरु किए गए आंदोलन में शामिल लोगों को चुन-चुनकर मारा गया। खास बात यह है कि सलवा जुडूम को शुरु करने वाले भाजपा नहीं बल्कि कांग्रेस नेता ही थे।

अमित शाह ने यह भी कहा कि अब नक्सली हिंसा करने वालों के दिन समाप्त हो गए हैं और सरकार पूरी दृढ़ता के साथ इस समस्या का अंत करने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि यह सरकार डरने वाली नहीं, बल्कि न्याय सुनिश्चित करने वाली है।

अमित शाह ने विपक्ष, विशेषकर कांग्रेस से पूछा कि 75 वर्षों में से 60 वर्षों तक शासन करने के बावजूद आदिवासी क्षेत्रों का विकास क्यों नहीं हुआ। उन्होंने कहा कि नक्सलवाद के कारण 12 करोड़ लोग गरीबी में रहे और लगभग 20 हजार युवाओं की जान गई। एक समय नक्सलवाद का रेड कॉरिडोर 12 राज्यों में फैला था, जो देश के बड़े भूभाग और लगभग 20 करोड़ आबादी को प्रभावित करता था। उन्होंने बताया कि लगभग 5 हजार सुरक्षा बलों के जवान शहीद हुए।

उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में 2014 के बाद स्पष्ट नीति और मजबूत राजनीतिक इच्छाशक्ति के साथ इस समस्या से निपटने का काम किया गया। उन्होंने बताया कि सूचना, जिम्मेदारी और समन्वय के साथ नई तकनीक का उपयोग किया गया। इसके साथ ही प्रभावी सरेंडर नीति लागू की गई, जिससे बड़ी संख्या में नक्सलियों ने आत्मसमर्पण किया।

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