भारत

पश्चिम एशिया में युद्ध के चलते तमिलनाडु का अंडा उद्योग प्रभावित, कीमतों में भारी गिरावट

नामक्कल- 04 मार्च। पश्चिम एशिया के देशों में जारी युद्ध और बढ़ते तनाव का असर अब तमिलनाडु के अंडा उद्योग पर स्पष्ट दिखने लगा है। राज्य के प्रमुख पोल्ट्री केंद्र नामक्कल सहित कई जिलों में अंडों का भंडारण तेजी से बढ़ा है, वहीं कीमतों में भी भारी गिरावट दर्ज की गई है। उत्पादकों ने आशंका जताई है कि यदि हालात जल्द सामान्य नहीं हुए तो दाम और नीचे जा सकते हैं।

तमिलनाडु के नामक्कल जिले से संयुक्त अरब अमीरात और सऊदी अरब जैसे खाड़ी देशों को बड़े पैमाने पर अंडों का निर्यात किया जाता रहा है। भारत से होने वाले कुल अंडा निर्यात में अकेले नामक्कल की हिस्सेदारी 83.42 प्रतिशत है, जिससे यह देश में पहले स्थान पर बना हुआ है।

हालांकि, पश्चिम एशिया में जारी युद्ध के कारण इन देशों को अंडों का निर्यात पूरी तरह ठप हो गया है। इसके परिणामस्वरूप नामक्कल और आसपास के जिलों में अंडों का भारी स्टॉक जमा हो गया है। पोल्ट्री फार्म संचालक अंडों को कोल्ड स्टोरेज में सुरक्षित रख रहे हैं और नुकसान कम करने के लिए अंडा पाउडर उत्पादन की ओर रुख कर रहे हैं।

राज्य में एक अंडे की कीमत 6 रुपये से घटकर 4.30 रुपये तक पहुंच गई है। इसके अतिरिक्त तमिलनाडु और केरल में रमजान तथा ईसाई समुदाय के लेंट (उपवास काल) शुरू होने से मांग में भी गिरावट आई है। मांग और निर्यात—दोनों में कमी आने से कीमतों पर लगातार दबाव बना हुआ है।

उल्लेखनीय है कि वर्ष 2024 में वैश्विक अंडा निर्यात में भारत 13वें स्थान पर था, जबकि 2025 में 2.6 प्रतिशत हिस्सेदारी के साथ 10वें स्थान पर पहुंच गया। इसमें तमिलनाडु की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण रही है।

भारत से निर्यात होने वाले कुल अंडों में तमिलनाडु की हिस्सेदारी 91.51 प्रतिशत है, जिसकी अनुमानित कीमत 1,355.90 करोड़ रुपये आंकी गई है। इनमें अकेले नामक्कल जिले का योगदान पिछले वर्ष की तुलना में दोगुना होकर 1,234.42 करोड़ रुपये तक पहुंच गया है।

उत्पादकों का कहना है कि यदि युद्ध की स्थिति जल्द सामान्य नहीं हुई तो अंडा उद्योग को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है, जिससे हजारों किसानों और श्रमिकों की आजीविका प्रभावित हो सकती है।

इस बीच अमेरिका और इज़राइल द्वारा ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई के बाद वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतें प्रति बैरल 100 डॉलर के करीब पहुंच रही हैं। इसके चलते भारत में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी की आशंका है। साथ ही शेयर बाजार में उतार-चढ़ाव और सोने की कीमतों में वृद्धि जैसी स्थितियां भी अर्थव्यवस्था पर दबाव बढ़ा सकती हैं।

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