
न्यायिक अधिकारियों पर सवाल उठाने की हिम्मत न करें: सुप्रीम कोर्ट
नई दिल्ली- 10 मार्च। उच्चतम न्यायालय पश्चिम बंगाल में वोटर लिस्ट से मतदाताओं के नाम हटाए जाने के खिलाफ दायर याचिका पर सुनवाई के दौरान कहा कि न्यायिक अधिकारियों पर सवाल उठाने की हिम्मत न करें। सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस ने कहा कि वे इसे बर्दाश्त नहीं करेंगे। कोर्ट ने पश्चिम बंगाल सरकार को निर्देश दिया कि वो न्यायिक अधिकारियों के काम के लिए सभी जरुरी सुविधाएं उपलब्ध कराएं।
कोर्ट ने निर्वाचन आयोग को ये सुनिश्चित करने को कहा कि कोई भी ऐसा कदम न उठाया जाए जो इस प्रक्रिया को बाधित करे, जब तक कि उसे हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस की अनुमति न मिल जाए। सुनवाई के दौरान कोर्ट को बताया गया कि इस पूरी प्रक्रिया से जुड़ी जानकारी हाई कोर्ट के आधिकारित टेलीग्राम ग्रुप पर रियल-टाइम में साझा की जा रही है। उच्चतम न्यायालय ने कहा कि पोर्टल में आने वाली दिक्कतों को तुरंत दूर किया जाए और यह सुनिश्चित किया जाए कि आगे कोई बाधा न आए।
कोर्ट ने कहा कि न्यायिक अधिकारी के फैसले के खिलाफ किसी प्रशासनिक निकाय के समक्ष अपील नहीं होगी। इसकी बजाय कलकत्ता हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस दो पूर्व हाई कोर्ट जज या मौजूदा हाई कोर्ट जजों की बेंच गठित कर सकते हैं जो इन अपीलों पर सुनवाई करेगी। उच्चतम न्यायालय ने निर्वाचन आयोग को निर्देश दिया कि वे अपील की इस व्यवस्था को लेकर आधिकारिक अधिसूचना जारी करें।
याचिका में कहा गया था कि विशेष गहन पुनरीक्षण के दौरान याचिकाकर्ताओं के नाम वोटर लिस्ट से हटा दिया गया। याचिकाकर्ताओं के नाम पहले के वोटर लिस्ट में थे। इन्होंने पहले मतदान किया था लेकिन उनके दस्तावेज स्वीकार नहीं किए गए। तब कोर्ट ने कहा था कि मौजूदा हालात में वे न्यायिक अधिकारियों के फैसलों पर अपील नहीं कर सकती।
बता दें कि 24 फरवरी को उच्चतम न्यायालय ने पश्चिम बंगाल में वोटर लिस्ट के विशेष गहन पुनरीक्षण में दावे और आपत्तियों का निपटारा करने के लिए राज्य के बाहर के न्यायिक अधिकारियों की तैनाती करने की अनुमति दी थी। कोर्ट ने कलकत्ता हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस से कहा था कि वे इस काम में तीन साल के अनुभव वाले एडिशनल सिविल जजों के अलावा झारखंड और ओडिशा से भी न्यायिक अधिकारियों की तैनाती करें।
दरअसल कलकत्ता हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस ने सुप्रीम कोर्ट से कहा था कि राज्य में ‘तार्किक विसंगति’ के 50 हजार से ज्यादा मामले हैं जिनका निपटारा करने के लिए न्यायिक अधिकारियों की कमी पड़ जाएगी। हाई कोर्ट की ओर से कहा गया था कि इस काम के लिए करीब 250 न्यायिक अधिकारियों को 80 दिनों तक तैनात करना पड़ेगा। उच्चतम न्यायालय ने कहा था कि पश्चिम बंगाल से बाहर के न्यायिक अधिकारियों की तैनाती पर आया खर्च निर्वाचन आयोग वहन करेगा। निर्वाचन आयोग राज्य के बाहर के न्यायिक अधिकारियों के यात्रा, ठहरने और मानदेय का खर्च वहन करेगा।



