
MADHUBANI: मुस्लिम युवक को “बांग्लादेशी”और“पाकिस्तानी” बताकर बेरहमी से पिटाई करने के मामले में पुलिस की सुस्त कार्रवाई पर उठ रहे सवाल
मधुबनी, 04 जनवरी। मधुबनी जिला के राजनगर थाना क्षेत्र के चकदह गांव में एक मुस्लिम युवक को “बांग्लादेशी”और“पाकिस्तानी” बताकर बेरहमी से पीटे जाने की घटना ने न सिर्फ मधुबनी जिले की कानून-व्यवस्था पर सवाल खड़ा कर दिया है, बल्कि पुलिस की कार्यशैली और सामाजिक संवेदनशीलता पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना के कई दिन बीत जाने के बावजूद अब तक किसी भी हमलावर की गिरफ्तारी नहीं होना, प्रशासन की निष्क्रियता को उजागर करता है।
मालूम हो कि उक्त घटना बीते 30 दिसंबर की है। बिहार के सुपौल जिले का निवासी पीड़ित युवक नगर निगम के तहत नाला निर्माण कार्य में राज मिस्त्री के रूप में काम करता था और रोज़ी-रोटी की तलाश में चकदह गांव पहुंचा था। आरोप है कि वहां मौजूद कुछ असामाजिक तत्वों ने उसे घेर लिया और बिना किसी आधार के विदेशी नागरिक बताकर उस पर हमला कर दिया। हमलावरों ने न सिर्फ उसकी बेरहमी से पिटाई की, बल्कि कथित तौर पर जबरन धार्मिक नारे भी लगवाए। उसके बाद वीडियो वायरल हुआ। फिर भी कार्रवाई नदारद है।
इस पूरी घटना का सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में हमलावरों के चेहरे साफ नजर आ रहे हैं। वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आने के बाद मामला राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में आया। दबाव बढ़ने पर मधुबनी के पुलिस अधीक्षक योगेंद्र कुमार ने मधुबनी सदर अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी-टु के नेतृत्व में एक विशेष जांच टीम के गठन करने की घोषणा की।
हालांकि, पीड़ित परिवार और स्थानीय लोगों का आरोप है कि पुलिस अधीक्षक द्वारा गठित विशेष टीम जमीनी स्तर पर सक्रियता कहीं नजर नहीं आ रही। पीड़ित परिवार का आरोप है कि जब हमलावरों की पहचान वीडियो में स्पष्ट है, तो अब तक आरोपियों की गिरफ्तारी पुलिस क्यों नहीं कर रही है।
मधुबनी जिले के प्रबुद्ध नागरिकों और सामाजिक संगठनों ने इस मामले में पुलिस की भूमिका पर गहरा असंतोष जताया है। नगर निगम के डिप्टी मेयर अमानुल्लाह खान एवं जेपी सेनानी हनुमान प्रसाद राउत का कहना है कि ऐसी घटनाएं सांप्रदायिक सौहार्द को नुकसान पहुंचा सकती हैं, फिर भी प्रशासन ढुलमुल रवैया अपनाए हुए है। इस तरह की घटना मानवाधिकार पर सीधा हमला है। यह मामला केवल मारपीट तक सीमित नहीं है, बल्कि यह मानवाधिकार और संवैधानिक मूल्यों पर सीधा हमला है। एक मेहनतकश मजदूर को उसकी पहचान और धर्म के नाम पर निशाना बनाना भीड़तंत्र की खतरनाक मानसिकता को दर्शाता है। भीड़तंत्र किसी एक समुदाय का दुश्मन नहीं होता, वह पूरे संविधान और लोकतंत्र का दुश्मन होता है। अगर आज एक गरीब मजदूर के लिए आवाज़ नहीं उठाई गई, तो कल किसी और की बारी होगी।
इधर बिहार राज्य अल्पसंख्यक आयोग के अध्यक्ष गुलाम रसूल बलियावी ने मधुबनी एसपी को पत्र लिखकर कहा है कि पुरी घटना की सही जांच कर दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की जाये।



