क्राइम

हैदराबाद में क्यूनेट रैकेट का भंडाफोड़: 11 महिलाओं सहित 32 लोग गिरफ्तार,करोड़ों की ठगी उजागर

हैदराबाद- 24 मार्च। हैदराबाद पुलिस ने देशभर में फैले करोड़ों रुपये के क्यूनेट से जुड़े धोखाधड़ी और अवैध मनी सर्कुलेशन रैकेट का पर्दाफाश करते हुए 11 महिलाओं समेत कुल 32 लोगों को गिरफ्तार किया है।

पुलिस आयुक्त वी.सी. सज्जनार ने मंगलवार को संवाददाता सम्मेलन में बताया कि तेलंगाना,आंध्र प्रदेश और कर्नाटक में करीब 30 स्थानों पर एक साथ छापेमारी कर चार मामलों में ये गिरफ्तारियां की गईं। गिरफ्तार आरोपितों में ग्रुप लीडर,मोटिवेटर,स्वतंत्र प्रतिनिधि और लोन एजेंट शामिल हैं।

गिरफ्तार किए गए आरोपित हैदराबाद,महबूबनगर,बेल्लमपल्ली,वारंगल, विशाखापत्तनम,एलुरु,नेल्लोर,नंद्याल,नरसीपटनम और ओडिशा के निवासी हैं।

पुलिस आयुक्त के अनुसार, यह रैकेट विहान डायरेक्ट सेलिंग प्राइवेट लिमिटेड से जुड़ा है, जो हांगकांग स्थित क्यूआई ग्रुप की फ्रेंचाइजी के रूप में भारत में क्यूनेट ब्रांड के तहत संचालित हो रहा था। इस अभियान के लिए सेंट्रल क्राइम स्टेशन ने 30 विशेष टीमों का गठन किया था।

पुलिस की जांच में सामने आया कि आरोपित आईटी और पूर्व आईटी कर्मचारी थे, जो लोगों को जोड़ने, प्रशिक्षण देने और निवेश के लिए प्रेरित करने का काम करते थे। यह नेटवर्क वर्ष 1998 से “गोल्ड क्वेस्ट” और “क्वेस्ट नेट” जैसे नामों से सक्रिय रहा है।

पुलिस उपायुक्त के अनुसार, आरोपियों ने डायरेक्ट सेलिंग के नाम पर सोशल मीडिया के जरिए विज्ञापन देकर लोगों को आकर्षित किया। इसमें दावा किया जाता था कि आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, कर्नाटक और अफ्रीकी देशों में ई-कॉमर्स व्यवसाय में निवेश कर अतिरिक्त आय अर्जित की जा सकती है। इस जाल में आईटी कर्मचारी,व्यवसायी,गृहिणियां और बेरोजगार युवा अधिक संख्या में फंसाए गए।

उन्होंने बताया कि रुचि दिखाने वाले लोगों को 19 से 22 प्रतिशत ब्याज दर पर फिनटेक के जरिए पर्सनल लोन लेने के लिए प्रेरित किया जाता था। उन्हें हैदराबाद के हाईटेक सिटी स्थित होटलों और कैफे में बुलाकर निवेश योजनाओं के बारे में बताया जाता था, लेकिन कंपनी की वास्तविक पहचान और एमएलएम (मल्टी-लेवल मार्केटिंग) संरचना को छिपाया जाता था।

पुलिस आयुक्त ने बताया कि आरोपितों द्वारा क्यूनेट का नाम सीधे नहीं लिया जाता था। वे ई-कॉमर्स बिजनेस में निवेश के नाम पर हर महीने आय का झांसा देते थे और 5 से 10 लाख रुपये के निवेश पर दो वर्षों में 3 से 4 करोड़ रुपये का मुनाफा होने का दावा करते थे। हालांकि, वास्तविक रिटर्न देने के बजाय पीड़ितों को ‘गिफ्ट’ के नाम पर आयुर्वेदिक उत्पाद, बिस्किट और शहद जैसे सामान दिए जाते थे। कई मामलों में निवेशकों की जानकारी के बिना उनकी राशि को उत्पाद खरीद में समायोजित कर लिया जाता था। साथ ही, उन्हें शामिल करने से पहले स्वेच्छा से भागीदारी दर्शाने वाले बॉन्ड पेपर पर हस्ताक्षर भी कराए जाते थे।

पुलिस आयुक्त के मुताबिक, तेलंगाना में अब तक 68 से अधिक पीड़ितों की पहचान हो चुकी है, जिनमें 22 हैदराबाद के हैं। उनकी शिकायतों के आधार पर पुलिस ने मामला दर्ज कर कार्रवाई शुरू की है।

पुलिस आयुक्त ने बताया कि एक दुखद मामले में सिद्धिपेट के एक व्यक्ति ने तो 5 लाख रुपये गंवाने के बाद पिछले वर्ष अक्टूबर में आत्महत्या कर ली थी। अपने सुसाइड नोट में उसने कंपनी के दावों को भ्रामक बताया था। कुछ मामलों में पीड़ितों ने नुकसान की भरपाई के लिए इसी तरह की योजनाएं स्थानीय स्तर पर शुरू कर दीं।

पुलिस के अनुसार, जिन लोगों के पास निवेश के लिए पैसे नहीं थे, उन्हें नेटवर्क के माध्यम से निजी ऋण दिलवाया जाता था और बाद में उनसे भारी रकम वसूली जाती थी। अब तक 11 पीड़ितों की जांच में करीब 75 लाख रुपये के नुकसान की पुष्टि हुई है।

अधिकारियों ने बताया कि मामले में अन्य फरार आरोपितों की तलाश जारी है और और भी पीड़ितों की पहचान की जा रही है।

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