भारत

केमिकल-फ्री और नेचुरल फार्मिंग को बढ़ावा देकर कृषि निर्यात बढ़ाने पर जोर: प्रधानमंत्री

नई दिल्ली- 06 मार्च। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने शुक्रवार को कहा कि दुनिया में स्वास्थ्य के प्रति बढ़ती जागरूकता के कारण ऑर्गेनिक और केमिकल-फ्री खाद्य उत्पादों की मांग तेजी से बढ़ रही है और भारत को इस अवसर का लाभ उठाते हुए प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देकर कृषि उत्पादों को निर्यात उन्मुख बनाना चाहिए।

प्रधानमंत्री ने “कृषि एवं ग्रामीण परिवर्तन” विषय पर आयोजित पोस्ट बजट वेबिनार को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से संबोधित करते हुए कहा कि आज वैश्विक स्तर पर ऑर्गेनिक डाइट, ऑर्गेनिक फूड और समग्र स्वास्थ्य देखभाल के प्रति लोगों की रुचि बढ़ रही है। ऐसे में भारत के किसानों के लिए प्राकृतिक खेती और केमिकल-फ्री उत्पाद वैश्विक बाजारों तक पहुंचने का एक “हाईवे” बन सकते हैं।

उन्होंने कहा कि सरकार इसके लिए प्रमाणन, प्रयोगशालाओं और आवश्यक ढांचे के विकास पर विचार कर रही है, लेकिन इस दिशा में सभी संबंधित पक्षों को मिलकर प्रयास करना होगा।

उन्होंने कहा कि केवल एक फसल पर निर्भर रहने से किसानों के लिए जोखिम बढ़ जाता है और आय के विकल्प सीमित हो जाते हैं। इसी कारण सरकार फसल विविधीकरण पर विशेष जोर दे रही है। खाने के तेल और दालों के लिए राष्ट्रीय मिशन तथा प्राकृतिक खेती पर राष्ट्रीय मिशन जैसे प्रयास कृषि क्षेत्र को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।

प्रधानमंत्री ने कहा कि कृषि भारत की दीर्घकालिक विकास यात्रा का एक रणनीतिक स्तंभ है। इसी सोच के साथ सरकार ने पिछले वर्षों में कृषि क्षेत्र को मजबूत करने के लिए कई कदम उठाए हैं।

उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि के तहत करीब 10 करोड़ किसानों को चार लाख करोड़ रुपये से अधिक की वित्तीय सहायता दी जा चुकी है, जिससे किसानों को आर्थिक सुरक्षा मिली है।

उन्होंने कहा कि न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) में सुधार के कारण किसानों को उनकी लागत का डेढ़ गुना तक लाभ मिल रहा है। संस्थागत ऋण की पहुंच 75 प्रतिशत से अधिक किसानों तक हो चुकी है। वहीं प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत लगभग दो लाख करोड़ रुपये के दावों का निपटारा किया गया है। इन पहलों के कारण किसानों का जोखिम कम हुआ है और कृषि क्षेत्र में आत्मविश्वास बढ़ा है।

प्रधानमंत्री ने कहा कि आज भारत अनाज, दालों और तिलहन का रिकॉर्ड उत्पादन कर रहा है, लेकिन 21वीं सदी के दूसरे चरण में प्रवेश करते हुए कृषि क्षेत्र में नई ऊर्जा भरना आवश्यक है। इस वर्ष के बजट में इसी दिशा में कई नए अवसर प्रदान किए गए हैं, जो उत्पादकता बढ़ाने और कृषि निर्यात को प्रोत्साहित करने में मदद करेंगे।

उन्होंने कहा कि वैश्विक बाजार तेजी से खुल रहे हैं और दुनिया की मांग में बदलाव आ रहा है। ऐसे में भारत को अपनी कृषि को निर्यात उन्मुख बनाने पर ध्यान देना होगा। देश के विविध जलवायु क्षेत्रों और समृद्ध एग्रो-क्लाइमेटिक जोन का लाभ उठाकर विभिन्न प्रकार की फसलों का उत्पादन बढ़ाया जा सकता है।

प्रधानमंत्री ने कहा कि बजट में उच्च मूल्य वाली कृषि पर विशेष ध्यान दिया गया है। इसके तहत नारियल, काजू, कोको और चंदन जैसी फसलों को क्षेत्रीय आधार पर प्रोत्साहित करने की योजना है।

उन्होंने बताया कि दक्षिण भारत के राज्यों, विशेषकर केरल और तमिलनाडु में बड़ी मात्रा में नारियल का उत्पादन होता है, लेकिन कई स्थानों पर पेड़ पुराने हो चुके हैं और उनकी उत्पादकता कम हो गई है। इसलिए बजट में नारियल उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए विशेष प्रावधान किए गए हैं, जिससे किसानों की आय बढ़ेगी।

उन्होंने कहा कि हिमालयी राज्यों में टेम्पर्ड नट फसलों को बढ़ावा देने का भी प्रस्ताव किया गया है। जैसे-जैसे निर्यात उन्मुख उत्पादन बढ़ेगा, वैसे-वैसे प्रोसेसिंग और वैल्यू एडिशन के माध्यम से ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे। इसके लिए सरकार, कृषि विशेषज्ञों, उद्योग और किसानों के बीच बेहतर समन्वय आवश्यक है।

प्रधानमंत्री ने कहा कि यदि उच्च मूल्य वाली कृषि को सामूहिक प्रयासों से बढ़ावा दिया जाए तो भारत का कृषि क्षेत्र वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बन सकता है। इसके लिए गुणवत्ता, ब्रांडिंग और अंतरराष्ट्रीय मानकों को बढ़ावा देना जरूरी है, ताकि भारतीय कृषि उत्पादों की वैश्विक बाजारों में मजबूत पहचान बन सके।

उन्होंने पशुपालन क्षेत्र को ग्रामीण अर्थव्यवस्था का तेजी से उभरता स्तंभ बताते हुए कहा कि भारत आज दुनिया का सबसे बड़ा दूध उत्पादक देश है और अंडा उत्पादन में दूसरे स्थान पर है। इस क्षेत्र को और आगे बढ़ाने के लिए बेहतर नस्ल, रोग नियंत्रण और वैज्ञानिक प्रबंधन पर ध्यान देने की आवश्यकता है।

प्रधानमंत्री ने कहा कि सरकार ग्रामीण समृद्धि के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। प्रधानमंत्री आवास योजना, प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना और स्वामित्व योजना जैसी योजनाओं ने गांवों की अर्थव्यवस्था को मजबूत किया है। उन्होंने कहा कि स्वयं सहायता समूहों को वित्तीय सहायता देकर महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाया जा रहा है।

उन्होंने कहा कि सरकार ने वर्ष 2029 तक तीन करोड़ और “लखपति दीदी” बनाने का लक्ष्य निर्धारित किया है, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों में महिलाओं की आय और आर्थिक भागीदारी बढ़ेगी। प्रधानमंत्री ने राज्यों से भी कृषि क्षेत्र पर अधिक ध्यान देने और किसानों को नई तकनीकों तथा बाजारों से जोड़ने के लिए मिलकर काम करने का आह्वान किया।

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