
MADHUBANI:- रौशन हत्याकांड में पुलिस की जांच सुस्त, एक माह बाद भी कार्रवाई शुन्य
मधुबनी- 29 मार्च। घोघरडीहा थाना क्षेत्र के चर्चित रौशन खातून हत्याकांड में घटना के एक माह बीत जाने के बाद भी पुलिस की कार्रवाई अधूरी बनी हुई है। अब तक न तो मामले की पर्यवेक्षण रिपोर्ट सामने आ सकी है और न ही प्राथमिकी में नामजद मुख्य आरोपी के अलावा अन्य आरोपियों की गिरफ्तारी हो पाई है। इससे पीड़ित परिवार को न्याय मिलने की उम्मीद धीरे-धीरे धुंधली पड़ती जा रही है। घटना के तत्काल बाद पुलिस ने विधि-व्यवस्था बनाए रखने के उद्देश्य से मुख्य आरोपी मगनू सिंह को गिरफ्तार कर सक्रियता जरूर दिखाई थी, लेकिन मामला शांत होते ही अनुसंधान की रफ्तार सुस्त पड़ गई। इसको लेकर क्षेत्र में तरह-तरह की चर्चाएं हो रही हैं और पुलिस की कार्यशैली पर गंभीर सवाल उठने लगे हैं।
मामले के अनुसंधानकर्ता एसआई सोमनाथ सिंह ने बताया कि मृतका की पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही आगे की कार्रवाई संभव हो सकेगी। हालांकि रिपोर्ट कब तक आएगी, इस पर उन्होंने स्पष्ट जवाब नहीं दिया। घटना के बाद विभिन्न सामाजिक संगठनों और राजनीतिक दलों के प्रतिनिधिमंडलों ने पीड़ित परिवार से मुलाकात कर त्वरित न्याय दिलाने का आश्वासन दिया था। इसी क्रम में 5 मार्च को राष्ट्रीय जनता दल की सात सदस्यीय जांच टीम अमही गांव पहुंची और घटना की तह तक जाने का प्रयास किया। टीम ने अपनी प्रारंभिक जांच में प्राथमिकी में नामजद सभी आरोपियों को ही जिम्मेदार ठहराते हुए पुलिसिया कार्रवाई पर भी गंभीर सवाल खड़े किए है। ज्ञात हो कि 25 फरवरी को अमही गांव निवासी रौशन खातून अपनी फरियाद लेकर पंचायत की मुखिया कुमारी देवी के पास पहुंची थीं। इसी दौरान विवाद इतना बढ़ गया कि आरोप है कि मुखिया के परिजनों ने रौशन खातून को खंभे से बांधकर बेरहमी से पिटाई कर दी। बाद में डायल 112 पुलिस को बुलाकर उसे थाना भेज दिया गया।
बताया जाता है कि थाने पर थानाध्यक्ष शुभम कुमार ने आपसी समझौते के बाद रौशन खातून को पीआर बांड पर छोड़ दिया। अगले दिन 26 फरवरी को तबीयत बिगड़ने पर परिजन उसे इलाज के लिए प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र घोघरडीहा ले गए, जहां से उसे अनुमंडलीय अस्पताल फुलपरास रेफर कर दिया गया। हालत गंभीर होने पर उसे डीएमसीएच और फिर पटना पीएमसीएच में भर्ती कराया गया। इसी बीच 28 फरवरी को मृतका के परिजनों ने फुलपरास अंचल पुलिस निरीक्षक से प्राथमिकी दर्ज करने की गुहार लगाई। 1 मार्च को पीएमसीएच में इलाज के दौरान रौशन खातून की मौत हो गई, जिसके बाद पुलिस ने आनन-फानन में दिए गए आवेदन पर प्राथमिकी दर्ज कर मुख्य आरोपी को गिरफ्तार किया।
हालांकि, घटना के इतने दिन बाद भी जांच में ठोस प्रगति नहीं होने से पीड़ित परिवार और स्थानीय लोगों में आक्रोश बढ़ता जा रहा है। लोगों का कहना है कि यदि समय रहते निष्पक्ष और तेज कार्रवाई नहीं हुई तो न्याय व्यवस्था से लोगों का भरोसा कमजोर पड़ सकता है।



